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प्राकृतिक परिवेश के अनुसार मानव के रहन-सहन संबंधी जानकारी पढ़कर चर्चा कीजिए। - Hindi - Composite [हिंदी - संयुक्त]

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Question

प्राकृतिक परिवेश के अनुसार मानव के रहन-सहन संबंधी जानकारी पढ़कर चर्चा कीजिए।

Answer in Brief

Solution

भारतवर्ष में मुख्य रूप से तीन ऋतुएँ हैं ग्रीष्म, वर्षा तथा शीत। प्रत्येक मौसम अपने आने की सूचना कुछ परिवर्तन के साथ देता है। सही और सुरक्षित पीने का पानी प्रदान करने के लिए स्थानीय जल स्रोतों का महत्व होता है। जल संरक्षण के लिए लोगों को जागरूक होना चाहिए और विभिन्न तकनीकी उपायों का इस्तेमाल करना चाहिए। मौसम के बदलाव का सबसे ज्यादा असर पर्यावरण और मानव के रहन-सहन पर पड़ता है। ऋतु परिवर्तन का मूल कारण है- पृथ्वी द्वारा सूर्य के चारों ओर परिक्रमण और प्रथ्वी का अक्षीय झुकाव।  जंगली और अदृश्य जीवों की मौजूदगी के अनुसार, लोगों को अपने रहन-सहन को सुरक्षित बनाए रखने के लिए उचित सावधानियां बरतनी चाहिए। ग्रीष्म ऋतु आने पर तापमान बढ़ जाता है। हवाओं में शुष्कता आ जाती है। पेड़-पौधों के बिकास की गति धीमी हो जाती है। उच्च तापमान, बर्फीले पर्वत, वृष्टि और इसके साथ-साथ उच्च जलस्तर वाले क्षेत्रों में बसे लोग अलग-अलग तरीकों से अपने रहन-सहन को संचित करते हैं। नदियों और तालाबों का जल सूखने लगता है। मनुष्य व पशु- पक्षियों का जीवन बेहाल हो जाता है। थोड़ी मेहनत करने पर भी ज्यादा थकान महसूस होने लगती हैं। सामान्यत: इस सम में लोग हल्के भोजन, हल्के कपड़ों का तथा ठंडे पदार्थों का उपयोग शुरू कर देतें हैं। नदी, तालाब, झरने तथा कुओं में जल इकट्ठा होने लगता हैं। मौसम में न ज्यादा गर्मी व न ज्यादा ठंडी होती है। पेड़-पौधों को वर्षा ऋतु के अंत तक विकास शुरू हो जाता है। नदी, तालाब, झरने तथा कुओं में जल इकट्ठा होने लगता हैं। कई बार बाढ़ की स्थितियाँ बन जाने से मानव व पशु-जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। शीत ऋतु के आने पर तापमान में ठंड बढ़ जाती है। पेड़-पौधे फूलने-फलने लगते हैं। सभी जीवों को नई ऊर्जा प्राप्त होने लंगतीहै। इस मौसम में मानव भोजन, वस्त्र तथा पेयें पदार्थों को उपयोग ग्रीष्म ऋतु के विपरीत करता है। पेड़-पौधों को वर्षा ऋतु के अंत तक विकास शुरू हो जाता है। और ठंड से बचने के लिए ऊनी कपड़ों का इस्तेमाल करतां है।

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सागर और मेघ
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Chapter 2.6: सागर और मेघ - स्वाध्याय [Page 43]

APPEARS IN

Balbharati Hindi (Composite) - Lokvani Class 9 Maharashtra State Board
Chapter 2.6 सागर और मेघ
स्वाध्याय | Q ३ | Page 43

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