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Question
पठित पद्यांश पर आधारित बहुविकल्पी प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प चुनकर लिखिए:
लखन कहा हसि हमरे जाना। सुनहु देव सब धनुष समाना।। का छति लाभु जून धनु तोरें। देखा राम नयन के भोरें।। छुअत टूट रघुपति हु न दोसू। मुनि बिनु काज करिअ कत रोसू।। बोले चितै परसु की ओरा। रे सठ सुनेहि सुभाउ न मोरा।। बालकु बोलि बधौं नहि तोही। केवल मुनि जड़ जानहि मोही।। बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वविदित क्षत्रियकुल द्रोही।। |
- पद्यांश में लक्ष्मण किन्हें संबोधित कर रहे हैं?
- श्रीराम को
- राजा जनक को
- परशुराम को
- विश्वामित्र को
- लक्ष्मण ने धनुष टूटने के लिए कौन-से तर्क दिए?
- सभी धनुष एक समान हैं
- पुराना धनुष टूटने से क्या हानि, क्या लाभ?
- वह तो छूते ही टूट गया
- मुनिवर आप इतना क्रोध क्यों कर रहे हो?
- I, II, IV
- II, III, IV
- I, II, III
- I, III, IV
- 'परशुराम ने अपने फरसे की ओर देखा' -इसका क्या भाव है?
- उनका फरसा अति सुन्दर है।
- उनका फरसा उनका सहारा है।
- वैसा फरसा किसी और के पास नहीं है।
- वे कमजोर नहीं, फरसाधारी वीर हैं।
- परशुराम ने लक्ष्मण का वध न करने के लिए क्या तर्क दिया?
- वे बालक का 'वध नहीं करेंगे।
- वे मुनि हैं, अत: किसी का वध नहीं करेंगे।
- वध करने के लिए उनका फरसा अनुपयुक्त है।
- ऐसा उनका स्वभाव ही नहीं है।
- परशुराम ने अपने परिचय में नहीं कहा:
- मैं निरा मुनि नहीं हूँ।
- मैं अत्यधिक क्रोधी हूँ।
- मैं बाल ब्रह्मचारी हूँ।
- मैं बहुत विद्वान हूँ।
Comprehension
Solution
- परशुराम को
- I, II, III
- वे कमजोर नहीं, फरसाधारी वीर हैं।
- वे बालक का 'वध नहीं करेंगे।
- मैं बहुत विद्वान हूँ।
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