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Question
Solution
महाराष्ट्र राज्य के खादी ग्रामोद्योग की स्थापना वर्ष १९६० में की गई थी। इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। खादी ग्रामोद्योग का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंदों को रोजगार उपलब्ध कराना और जनता व देश का विकास करना है। खादी के कपड़े शुद्ध रूप से सूती होते हैं। खादी के कपड़े के लिए बड़े पैमाने पर कपास की खेती की आवश्यकता पड़ती है। कपास के पौधों से कपास निकाला जाता है। उस कपास की चरखे पर कताई की जाती है जिससे धागा बनता है। इस धागे से कपड़े की बुनाई होती है। उसमें मनचाही कारीगरी कर कपड़ा तैयार किया जाता है। इन तैयार कपड़ों को खादी की दुकानों में आवश्यकता नुसार वितरित किया जाता है और फिर इन कपड़ों का विक्रय होता है।
खादी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारत की स्वतंत्रता संग्राम की पहचान है। महात्मा गांधी ने इसे आत्मनिर्भरता का प्रतीक बनाया था, और आज भी यह स्थानीय रोजगार और सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
"खादी अपनाएँ, स्वदेशी को बढ़ाएँ!"