English

शहरी जीवन शुरू होने के बाद कौन-कौन सी नयी संस्थाएँ अस्तित्त्व में आईं? आपके विचार से उनमें से कौन-सी संस्थाएँ राजा की पहल पर निर्भर थीं? - History (इतिहास)

Advertisements
Advertisements

Question

शहरी जीवन शुरू होने के बाद कौन-कौन सी नयी संस्थाएँ अस्तित्त्व में आईं? आपके विचार से उनमें से कौन-सी संस्थाएँ राजा की पहल पर निर्भर थीं?

Long Answer

Solution

मेसोपोटामिया में कालांतर में अनेक भव्य नगरों का निर्माण हुआ जिनमें उरुक, लांगाश, बेबीलोन व मारी प्रमुख नगर थे। दक्षिणी मेसोपोटामिया में लगभग 5000 ई०पू० के आस-पास आर्थिक गतिविधियों के परिणामस्वरूप नयी-नयी बस्तियाँ स्थापित होने लगी थीं। इन बस्तियों में से कुछ बस्तियों ने प्राचीन शहरों का रूप धारण कर लिया था। इन शहरों की स्थिति के अनुसार निम्नलिखित विशेषताएँ भी थीं

  • मंदिर के चारों तरफ विकसित शहर
  • व्यापारिक केंद्रों के आसपास विकसित शहर
  • शाही शहर।

मेसोपोटामिया के तत्कालीन देहातों में जमीन और पानी के लिए बार-बार लड़ाइयाँ होती रहती थीं। जब किसी क्षेत्र में लंबे समय तक लड़ाई चलती थीं, जो मुखिया लड़ाई में जीत जाते थे, वे अपने साथियों एवं अनुयायियों में लूट का माल बाँटकर उन्हें खुश कर देते थे और पराजित लोगों को बंदी बनाकर अपने साथ ले जाते थे। जिन्हें वे कालांतर में अपने चौकीदार या नौकर बना लेते थे। वे इस प्रकार अपना वर्चस्व बढ़ा लेते थे।

युद्ध में विजयी होने वाला मुखिया स्थायी रूप से समुदाय के मुखिया नहीं बने रहते थे। उनका स्थान दूसरे नेता भी ले लिया करते थे। कालांतर में इस प्रक्रिया में बदलाव तब आया जब इन नेताओं ने समुदायों के कल्याण की तरफ अधिक ध्यान देना प्रारंभ किया। परिणामस्वरूप नयी-नयी संस्थाएँ वे परिपाटियाँ स्थापित हो गईं। विजेता मुखिया ने मंदिर में देवताओं की मूर्तियों पर कीमती भेटें चढ़ाना शुरू कर दिया। इससे समुदाय के मंदिरों की सुंदरता बढ़ गई। एनमर्कर से जुड़ी कविताएँ व्यक्त करती हैं कि इस व्यवस्था ने राजा को ऊँचा स्थान दिलाया तथा उसका पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया। पारस्परिक हितों को सुदृढ़ करने वाले विकास के एक ऐसे दौर की कल्पना कर सकते हैं। जिसमें मुखिया लोगों ने ग्रामीणों को अपने पास बसने के लिए प्रोत्साहित किया जिससे वे आवश्यकता पड़ने पर तुरंत अपनी सेना इकट्ठी कर सकें। एक अनुमान के अनुसार एक मंदिर को बनाने के लिए 1500 आदमियों को पाँच साल तक प्रतिदिन 10 घंटे काम में लगे रहना पड़ता था।

उपरोक्त आधारों से पता चला है कि नगरों की सामाजिक व्यवस्था में एक उच्च या संभ्रांत वर्ग भी उत्पन्न हो। चुका था और धन-दौलत का ज्यादातर हिस्सा इसी वर्ग के हाथों में केंद्रित था। इसकी पुष्टि उस शहर में राजाओं व रानियों की कब्रों व समाधियों से खुदाई के दौरान प्राप्त बहुमूल्य चीजों; जैसे-आभूषण, सोने के पात्र, सफ़ेद सीपियाँ और लाजवर्द जड़े हुए लकड़ी के वाद्ययंत्र, सोने के सजावटी खंजरों आदि से हुई है। कानूनी दस्तावेजों (विवाह, उत्तराधिकार आदि के मामलों से संबंधित) से पता चलता है कि मेसोपोटामिया के समाज में एकल परिवार को ही आदर्श माना जाता था।

हमें विवाह आदि से संबंधित प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिली है। विवाह करने की इच्छा की घोषणा की जाती थी। और वधू के माता-पिता विवाह के लिए अपनी अनुमति व सहमति प्रदान करते थे। वर पक्ष के लोग वधू पक्ष को कुछ उपहार देते थे। विवाह की रस्म आदि के बाद दोनों पक्ष एक-दूसरे को उपहार देते थे और बैठकर भोजन करते थे। भोजन आदि के बाद मंदिर में जाकर भेंट चढ़ाते थे। जब नववधू को उसकी सास लेने आती थी, तब वधू को उसके पिता द्वारा उत्तराधिकार के रूप में उसका हिस्सा दे दिया जाता था। पिता का घर, जानवर, खेत आदि पैतृक संपत्ति उसके पुत्रों को मिलते थे।

सुव्यवस्थित प्रशासन व्यवस्था के अभाव में राज्य का कामकाज सुचारु ढंग से चलाना कठिन हो जाता था। अतः मेसोपोटामिया के शासकों ने एक सुव्यवस्थित प्रशासन व्यवस्था की नींव रखी। ऐसी प्रबंध व्यवस्था के कारण ही उस राज्य में शांति व सुव्यवस्था बनी रही जो मेसोपोटामिया के विकास के लिए आवश्यक था।

shaalaa.com
शहरों में माल की आवाजाही
  Is there an error in this question or solution?
Chapter 2: लेखन कला और शहरी जीवन - अभ्यास [Page 48]

APPEARS IN

NCERT History [Hindi] Class 11
Chapter 2 लेखन कला और शहरी जीवन
अभ्यास | Q 5. | Page 48
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×