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Question
'श्रम विभाजन और जाति-प्रथा' पाठ के आधार पर बताइए कि किसी मनुष्य को व्यवसाय बदलने की आवश्यकता कब पड़ती है और किसी मनुष्य को जीवन-भर के लिए यदि एक ही व्यवसाय में बाँध दिया जाए तो उसके क्या परिणाम निकलेंगे?
Answer in Brief
Solution
- डॉ. अंबेडकर का मानना था कि सभी व्यक्ति समान नहीं होते। व्यक्ति जन्म से ही सामाजिक स्तर और अपने प्रयासों के कारण भिन्न होते हैं। हालांकि पूर्ण समता एक काल्पनिक स्थिति है, लेकिन हर व्यक्ति को अपनी क्षमता को विकसित करने के लिए समान अवसर अवश्य मिलने चाहिए।
- भारत में जातिप्रथा के कारण, जन्म के आधार पर किसी का पेशा तय कर देना, जीवनभर उसी पेशे में बँधे रहना, और जाति के आधार पर ऊँच-नीच का भेदभाव करना आम है। यहाँ तक कि बेरोजगारी और भुखमरी की स्थिति में भी पेशा बदलने की अनुमति नहीं होती।
- इस व्यवस्था के कारण व्यक्ति को जन्म के आधार पर थोपे गए पेशे को अपनाना पड़ता है, जिससे उन्हें विकास के समान अवसर नहीं मिलते। जबरन थोपे गए पेशे में उनकी रुचि नहीं होती, जिससे वे काम टालते हैं या कामचोरी करते हैं। कार्य में एकाग्रता की कमी के कारण आर्थिक नुकसान होता है और उद्योगों का विकास रुक जाता है। ऐसी स्थिति में व्यक्ति के लिए व्यवसाय बदलना आवश्यक हो जाता है।
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