Advertisements
Advertisements
Question
समाजशास्त्र धर्म का अध्ययन कैसे करता है?
Answer in Brief
Solution
इमाइल दुर्खाइम के अनुसार, “धर्म पवित्र वस्तुओं से संबंधित अनेक विश्वासों और व्यवहारों की एक ऐसी संगठित व्यवस्था है, जो उन व्यक्तियों को एक नैतिक समुदाय की भावना में बाँधती है, जो उसी प्रकार के विश्वासों और व्यवहारों को अभिव्यक्त करते हैं।”
- समाजशास्त्री धार्मिक प्राणियों में विश्वास के रूप में धर्म का अध्ययन करते हैं।
- धर्म, कार्य तथा विश्वास की पद्धति एक सामाजिक प्रपंच और व्यक्तिगत अनुभूति का एक तरीका है।
- धर्म अलौकिक शक्ति में विश्वास पर आधारित है। जिसमें जीववाद की अवधारणा सम्मिलित है।
- समाजशास्त्रीय परिदृश्य में धर्म समाज के लिए अनेक कार्यों का निर्वाह करता है। यह सामाजिक नियंत्रण का एक स्वरूप है।
- धर्म सभी ज्ञात समाजों में विद्यमान है। हालाँकि धार्मिक विश्वास और व्यवहार का स्वरूप विभिन्न संस्कृतियों में अलग-अलग है।
- धर्म वस्तुतः एक व्यक्तिगत प्रपंच है, लेकिन इसका सार्वजनिक पहलू भी है, जिसका सामाजिक संस्था पर व्यापक प्रभाव है।
- धर्म प्रथाओं और अनुष्ठानों का संग्रह है। धर्म की उपस्थिति के कारण लोग प्रथाओं और प्रतिमानों का आदर करते हैं, जो सामाजिक तंत्र का पोषण करते हैं।
- धर्म लोगों को जटिल, संतुलित, एकीकृत, स्वस्थ्य और खुशहाल व्यक्तित्व के निर्माण तथा सामाजिक कल्याणकारी कार्यों में सहभागिता के लिए प्रेरित करता है।
- समाजशास्त्री धर्म के लोक स्वरूप का अध्ययन करता है, क्योंकि सामाजिक परिदृश्य में इसका सर्वाधिक महत्व है, जो समाज और सामाजिक संस्था का ध्यान रखता है।
shaalaa.com
धर्म
Is there an error in this question or solution?