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Question
समूह निर्माण को समझने में तकमैन का अवस्था मॉडल किस प्रकार से सहायक है?
Long Answer
Solution
अन्य चीजों की तरह समूह का विकास भी होती है। जिस क्षण आप लोगो के संपर्क में आते है उसी समय आप समूह के सदस्य नहीं बन जाते है। समोसा मान्यता निर्माण, दवंद, स्थायीकरण, निष्पादन और अस्वीकरण की विभिन्न अवस्थाओं से गुजरता है। तकमैन ने बताया है की समूह पांच विकासात्मक अनुक्रमों से गुजरती है। यह पांच अनुक्रम है - निर्माण या आकृतिकरण, विप्लवन या झंझावात, प्रतिमान या मानक निर्माण, निष्पादन एवं समापन।
- जब समूह के सदस्य पहली बार मिलते है तो, लक्ष्य एवं लक्ष्य को प्राप्त करने के संबंध में अत्यधिक अनिश्चितता होती है। दूसरे को जानने का प्रयत्न करते है और यह मूल्यांकन करते है की समूह के लिए उपयुक्त रहेंगे। यहां उत्तेजना के साथ ही भय का भी निर्माण होता है। निर्माण जागृति कारण की अवस्था कहा जाता है।
- इस अवस्था में अंतर - समूह दवंद की अवस्था दिखाई देती है, जिसमे समूह और उसके संसाधनो को कौन, कैसे कार्य निष्पादित करता है पर चर्चा होती है। इसे ही विप्लवन या अवस्था कहा जाता है।
- विप्लव झंझावात की अवस्था के बाद एक दुसरी अवस्था आती है जिसे प्रतिमान या मानक निर्माण की अवस्था के नाम से जाना जाता है। इस अवधि में समूह के सदस्य समूह व्यवहार से संबंधित मानक विकसित करते है। यह सकारात्मक समूह अनन्यता के विकास का मार्ग प्रशस्त करता है।
- चौथी अवस्था निष्पादन की होती है। इस अवस्था तक समूह की संरचना विकसित हो चुकी होती है। समूह के सदस्य से स्वीकार कर लेते है। समूह लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में समूह अग्रसर होता है। कुछ समूहों के लिए यह समूह विकास की अंतिम अवस्था होती है।
- और कुछ समूह के लिए, विद्यालय समारोह के लिए आयोजन समिति के संदर्भ में एक अन्य अवस्था होती है जिसे समापन की अवस्था के नाम से जाना जाता है। इस अवस्था में जब समूह का कार्य पूरा हो जाता है तब समूह भंग किया जा सकता है।
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समूह की प्रकृति एवं इसका निर्माण
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