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Question
सर्जनात्मक चिंतन में विभिन्न प्रकार के अवरोध क्या है?
Solution
सर्जनात्मक चिंतन करने में विभिन्न अवरोध आते हैं, जिन्हें आभ्यासिक, प्रात्यक्षिक, अभिप्रेरणात्मक, संवेगात्मक एवं सांस्कृतिक वर्गों में वर्गीकृत किया जा सकता है। नियमित कार्यों को सरलता एवं दक्षता से करने के लिए यद्यपि आभ्यासिक अधिगम की अधिक आवश्यकता होती है, फिर भी आदतों के वशीभूत हो जाने, विशेष रूप से सोचने या चिंतन करने के तरीकों में, की प्रवृत्ति सर्जनात्मक अभिव्यक्ति के लिए हानिकारक हो सकती है।
हम किसी घटना या वस्तु के सुपरिचित तौरके से चिंतन और प्रत्यक्षण के इतने अधिक अभ्यस्त हो जाते हैं कि नए तरीके से सोचना बहुत कठिन हो जाता है। शीघ्रता से निष्कर्ष पर पहुँचने की हमारी यह प्रवृत्ति, समस्याओं को नवीन परिप्रेक्ष्य में न देखने, कार्य करने के सामान्य एवं घिसे-पिटे तरीके से संतुष्ट हो जाने या पूर्वकल्पित धारणाओं से ऊपर उठने की इच्छा का अभाव, तात्कालिक निर्णय में परिवर्तन की अयोग्यता इत्यादि से संबंधित हो सकती है। प्रात्यक्षिक अवरोध हमें नए और मौलिक विचारों के प्रति खुला दृष्टिकोण रखने से रोकते हैं।