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“सरसुति के भंडार की, बड़ी अपूरब बात। ज्यौं खरचै त्यौं-त्यौं बढ़ै, बिन खरचे घटि जात॥ नैना देत बताय सब, हिय को हेत-अहेत। जैसे निरमल आरसी, भली बुरी कहि देत॥ - Hindi

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Question

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:  

“सरसुति के भंडार की, बड़ी अपूरब बात।
ज्यौं खरचै त्यौं-त्यौं बढ़ै, बिन खरचे घटि जात॥

नैना देत बताय सब, हिय को हेत-अहेत।
जैसे निरमल आरसी, भली बुरी कहि देत॥

अपनी पहुँच बिचारि कै, करतब करिए दौर।
तेते पाँव पसारिए, जेती लाँबी सौर॥

फेर न ह्वै हैं कपट सों, जो कीजै ब्यौपार।
जैसे हाँड़ी काठ की, चढ़े न दूजी बार॥

  1. उत्तर लिखिए:   (२)
    1. इसके भंडार की बात बड़ी अपूरब है - ______
    2. आँखें मन की इन बातों को व्यक्त कर देती हैं - ______
    3. इसे पहचानकर कोई भी कार्य करना चाहिए - ______
    4. व्यापार में इसका सहारा नहीं लेना चाहिए - ______
  2. निम्नलिखित शब्दों के लिए पद्यांश में आए हुए समानार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए:   (२)
    1. आँख - ______
    2. पैर - ______
    3. आईना - ______
    4. छल - ______
  3. 'अपनी क्षमताओं को पहचानकर काम करना चाहिए' इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।   (२)
Comprehension

Solution

  1.  
    1. इसके भंडार की बात बड़ी अपूरब है - सरसुति 
    2. आँखें मन की इन बातों को व्यक्त कर देती हैं - दर्पण
    3. इसे पहचानकर कोई भी कार्य करना चाहिए - क्षमता
    4. व्यापार में इसका सहारा नहीं लेना चाहिए - कपट
  2.  
    1. आँख - नैना
    2. पैर - पाँव
    3. आईना - आरसी
    4. छल - कपट
  3. हर व्यक्ति की अपनी अलग क्षमताएँ और सीमाएँ होती हैं। सफलता प्राप्त करने के लिए हमें अपनी योग्यता को पहचानकर ही कार्य करना चाहिए। जो काम हमारी पहुँच में है, उसे सोच-समझकर करना चाहिए, क्योंकि बिना आकलन किए काम करने से असफलता हाथ लग सकती है। हमें उतना ही प्रयास करना चाहिए जितना हमारी क्षमता और संसाधनों के अनुसार उचित हो। आवश्यकता से अधिक जोखिम उठाने से हानि हो सकती है, ठीक वैसे ही जैसे पैर उतने ही फैलाने चाहिए जितनी चादर लंबी हो। इसलिए, बुद्धिमानी इसी में है कि हम अपनी योग्यताओं को समझकर, उचित योजना के साथ कार्य करें।
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