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Question
निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतिया कीजिए:
नानक गुरु न चेतनी मनि आपणे सुचेत। छूते तिल बुआड़ जिक सुएं अंदर खेत ॥ खेते अंदर छुट्टयां कहु नानक सऊ नाह। 'फली अहि फूली अहि बपुड़े भी तन बिच स्वाहं॥१॥ जलि मोह घसि मसि करि, मति कागद करि सारु, भाइ कलम करिं चितु, लेखारि, गुरु पुछि लिखु बीचारि, लिखु नाम सालाह लिखु, |
1. संजाल पूर्ण कीजिए। (2)
2. निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए: (2)
- मति
- सुचेत
- लेखारि
- सऊ
3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए: (2)
'गुरु बिन ज्ञान न होइ' इस उक्ति पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।
Solution
1.
2.
- मति - बुद्धि
- सुचेत - सचेत
- लेखारि - लेखक
- सऊ - ईश्वर
3. ज्ञान की कोई सीमा नहीं है। विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न-भिन्न प्रकार के ज्ञान की आवश्यकता होती है। यह ज्ञान हमें किसी-न किसी व्यक्ति से मिलता है। जिस व्यक्ति से हमें यह ज्ञान मिलता है, वही हमारे लिए गुरु होता है। बचपन में बच्चे का पालन-पोषण कर उसे बड़ा करके बोलने-चालने और बोली-भाषा सिखाने का काम माता करती है। उस समय वह बच्चे की गुरु होती है। बड़े होने पर बच्चे को विद्यालय में शिक्षकों से ज्ञान प्राप्त होता है। पढ़-लिखकर जीवन में पदार्पण करने पर हर व्यक्ति को किसी-न-किसी से अपने काम-काज करने का ढंग सीखना पड़ता है। इस तरह के लोग हमारे लिए गुरु के समान होते हैं। मनुष्य गुरुओं से ही सीखकर विभिन्न कलाओं में पारंगत होता है। बड़े-बड़े विद्वान, विचारक, राजनीति, समाजशास्त्री, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री अपने-अपने गुरुओं से ज्ञान प्राप्त करके ही महान हुए हैं। अच्छी शिक्षा देने वाला गुरु होता है। गुरु की महिमा अपरंपार है। गुरु ही हमें गलत या सही में भेद करना सिखाते हैं। वे अपने मार्ग से भटके हुए लोगों को सही मार्ग दिखाते हैं। यह सच है कि गुरु के बिना ज्ञान नहीं होता।