Advertisements
Advertisements
Question
निम्नलिखित पठित गद्यांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए-
एक दिन साधु ने देखा कि घोड़ों-ऊँटों और बैलगाड़ियों का झुंड उसकी कुटी की तरफ चलता आ रहा है। मन में संदेह हुआ कि लोगों को उसकी असलियत का पता तो नहीं चल गया और ये सरकार के आदमी उसे पकड़ने चले आ रहे हैं। वह अभी यही सब सोच ही रहा था कि देखा, उस झुंड के आगे-आगे वही सेठ है। सेठ पास आया। उसने साधु को प्रणाम किया। गाड़ियों, घोड़ों, ऊँटों से, सोने-चाँदी के गहनों, मुहरों और जवाहरातों से भरे कलसे उतारे गए। देखते-देखते कुटी के सामने ढेर लग गया। सेठ ने साधु के चरण पकड़कर कहा- “महाराज, आपके उपदेशों से मुझे सच्चा ज्ञान प्राप्त हो गया है और इस संसार से मन फिर गया है। झूठ-कपट से मैंने जो धन कमाया है, वह सब मैं आपके चरणों में रख रहा हूँ। |
(1) संजाल पूर्ण कीजिए- (2)
(2) (i) गद्यांश में प्रयुक्त शब्द युग्म की जोड़ी लिखिए। (1)
(ii) गद्यांश में प्रस्तुत विलोम शब्द की जोड़ी लिखिए: (1)
______ × ______
(3) साधु-सन्तों के स्वभाव के बारे में अपने विचार 25 से 30 शब्दों में लिखिए। (2)
Answer in Brief
Chart
One Word/Term Answer
Solution
(1)
(2) (i) देखते - देखते
(ii) झूठ × सच/सत्य
(3) भारतीय संस्कृति में साधु-संतों को सबसे बड़ा स्थान दिया गया है। वे स्वाभाविक रूप से लोगों को दे रहे हैं। उन्हें वैश्विक समृद्धि का बोध है। इनके सान्निध्य में ही जीवन भक्तिमय हो सकता है। मानव कल्याण के लिए कार्य करते समय वे हमेशा उन कारकों के प्रति सचेत रहते हैं जो लोक कल्याण और विश्व शांति का समर्थन करते हैं।
shaalaa.com
कलाकार
Is there an error in this question or solution?