English

सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए। हमने रचा, आओ ! हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को। यह क्या मिलन, मिलना वही, जो मोड़ दे मँझधार को। जो साथ फूलों के चले, जो ढाल पाते ही ढले, -

Advertisements
Advertisements

Question

निम्नलिखित पठित काव्यांश को पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए।

 

हमने रचा, आओ ! हमीं अब तोड़ दें इस प्यार को।
यह क्या मिलन, मिलना वही, जो मोड़ दे मँझधार को।
जो साथ फूलों के चले,
जो ढाल पाते ही ढले,
यह जिंदगी क्या जिंदगी जो सिर्फ पानी-सी बही।
सच हम नहीं, सच तुम नहीं।

अपने हृदय का सत्य, अपने-आप हमको खोजना।
अपने नयन का नीर, अपने-आप हमको पोंछना।
आकाश सुख देगा नहीं
धरती पसीजी है कहीं !
हर एक राही को भटककर ही दिशा मिलती रही।
सच हम नहीं, सच तुम नहीं।

बेकार है मुस्कान से ढकना हृदय की खिन्नता।
आदर्श हो सकती नहीं, तन और मन की भिन्नता।
जब तक बँधी है चेतना
जब तक प्रणय दुख से घना
तब तक न मानूँगा कभी, इस राह को ही मैं सही।
सच हम नहीं, सच तुम नहीं ।

- (नाव के पाँव कविता संग्रह से')

1. कविता की पंक्तियाँ पूर्ण कौजिए:   (2)

  1. अपने हृदय का सत्य, ______
  2. यह जिंदगी कया जिंदगी ______
  3. आदर्श हो सकती नहीं, ______
  4. तब तक न मानूँगा कभी, ______

2. प्रत्येक शब्द के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए।  (2)

  1. नीर - ______
  2. फूल - ______
  3. हृदय - ______
  4. नयन - ______

3. निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर 40 से 50 शब्दों में लिखिए।  (2)

“जीवन निरंतर चलते रहने का नाम है।” इस विचार पर अपना मत स्पष्ट कीजिए।

Answer in Brief
One Line Answer
One Word/Term Answer

Solution

1. 

  1. अपने हृदय का सत्य, अपने-आप हमको खोजना
  2. यह जिंदगी कया जिंदगी जो सिर्फ पानी-सी वही
  3. आदर्श हो सकती नहीं, तन और मन की भिन्‍नता
  4. तब तक न मानूँगा कभी, इस राह को ही मैं सही

2.

  1. नीर - अंबु, जल
  2. फूल - पुष्प, सुमन
  3. हृदय - उर, वक्ष
  4. नयन - चश्रु, आँख

3. जीवन का उद्देश्य निरंतर आगे-ही-आगे बढ़ते रहना है। जीवन में ठहराव आने को मृत्यु की संज्ञा दी जाती है। अनेक महापुरुषों ने अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए जीवन भर संघर्ष किया है और उनका नाम अमर हो गया है। जीवन का मार्ग आसान नहीं है। उस पर पग-पग पर कठिनाइयाँ आती रहती हैं। इन कठिनाइयों से उसे जूझना पड़ता है। उसमें हार भी होती है और जीत भी होती है। असफलताओं से मनुष्य को घबराना नहीं चाहिए। बल्कि उनका दृढ़तापूर्वक सामना करके उसमें से अपना मार्ग प्रशस्त करना और निरंतर आगे बढ़ते रहना चाहिए। एक दिन मंजिल अवश्य मिलेगी। जीवन संघर्ष कभी न खत्म होने वाला संग्राम है। इसका सामना करने का एकमात्र मार्ग है निरंतर चलते रहना और हर स्थिति में संघर्ष जारी रखना।

shaalaa.com
सच हम नहीं; सच तुम नहीं
  Is there an error in this question or solution?
Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×