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'सूने विराट के सम्मुख दाग से!'- पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए। - Hindi (Elective)

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Question

'सूने विराट के सम्मुख ............ दाग से!'- पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।

Answer in Brief

Solution

इस संसार में हर वस्तु नश्वर है। तात्पर्य है कि हर वस्तु को एक दिन समाप्त हो जाना है। इस के डर से मनुष्य भयभीत रहता है। मगर जब बूँद सागर से क्षणभर के लिए अलग होती है, तो उसे नष्ट होने का डर समाप्त हो जाता है। मुक्ति का अहसास उसके हृदय में भर जाता है। यह वह क्षण होता है, जब वह स्वयं के जीवन को या अस्तित्व को सार्थक कर देती है। मधुर मिलने से प्राप्त प्रकाश इस कलंक को धो डालता है कि मनुष्य जीवन भी एक दिन समाप्त हो जाएगा। प्रकाशित वह क्षण ही उसके जीवन को सार्थकता प्रदान कर देती है। कवि उस बूँद में उस विशालता के दर्शन के करता है, जो उसे सागर की अथाह जल राशि को देखकर भी प्राप्त नहीं होता है। उस अहसास होता है कि वह अपने समाप्त होने वाले शरीर से भी ऐसे कार्य कर सकता है, जो उसके छोटे से जीवन को सार्थकता प्रदान करता है। वह ऐसा साधक बन जाता है, जिसे सभी पापों से छुटकारा मिल गया है।

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मैंने देखा, एक बूँद
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Chapter 1.03: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद) - प्रश्न-अभ्यास [Page 19]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Antara Class 12
Chapter 1.03 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद)
प्रश्न-अभ्यास | Q 3. | Page 19
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