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Question
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जयपुर फुट तकनीक
Short Note
Solution
- 'जयपुर फुट' की खोज से भारत के दिव्यांगों का जीवन बदल गया। 1968 से पूर्व एकाध व्यक्ति जब दुर्घटनाग्रस्त होकर अपना पैर गँवा बैठता तो शेष जीवन उसे बहुत कठिनाई से गुजारना पड़ता था।
- इसपर उपाय के रूप में डॉ. प्रमोद सेठी ने कुशल कारीगर रामचंद्र शर्मा की सहायता से कृत्रिम हाथ, पैर, नाक, कान तैयार किए।
- जयपुर फुट तकनीकी के उपयोग से तैयार किए गए कृत्रिम अंगों के कारण दिव्यांग रोगी नंगे पैर, ऊबड़-खाबड़ जमीन पर चलना, दौड़ना, साइकिल चलाना, खेतों में काम करना, पेड़ पर चढ़ना, पर्वतारोहण करना जैसे काम सहजता के साथ कर सकता है।
- इस कृत्रिम पैर में जूता पहनने की आवश्यकता न होने से जूते का खर्च बचता है।
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बदलता जीवन
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