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वाचन जगत से: किसी सफल व्यक्ति की आत्मकथा का अंश पढ़ो और कक्षा में सुनाओ, परिचय, प्रेरक प्रसंग, सीख - English (Second/Third Language)

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Question

वाचन जगत से:

Writing Skills

Solution

महात्मा गांधी की आत्मकथा

मोहनदास करमचंद गांधी (महात्मा गांधी) का जन्म 2 अक्टूबर 1869, को पोरबंदर, गुजरात में हुआ था। गांधी जी स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नेता, सत्य और अहिंसा के प्रतीक थे। महात्मा गांधी ने अपने जीवन में सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों का पालन किया और भारत की स्वतंत्रता के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया।

एक बार गांधीजी ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने स्कूल के दिनों में गलती से अपने पिता के पैसे चुराए थे। उन्होंने अपने पिता को यह बात एक पत्र में लिखकर माफी माँगी। उनके पिता ने उन्हें क्षमा कर दिया, और उस घटना से गांधीजी ने सत्य और ईमानदारी का महत्व सीखा। इस प्रसंग ने उनके जीवन में सत्य के प्रति समर्पण को मजबूत किया।

सीख:

  • सत्य और ईमानदारी: अपने जीवन में सच्चाई का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण है।
  • स्वीकृति और सुधार: अपनी गलती स्वीकार करके सुधार करना एक महान गुण है।
  • क्षमा का महत्व: दूसरों को माफ करना और खुद को बेहतर बनाना हमारे जीवन को सकारात्मक बनाता है।
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Chapter 1.2: गुनगुनाते रहो - स्वाध्याय [Page 5]

APPEARS IN

Balbharati Integrated 7 Standard Part 1 [Hindi Medium] Maharashtra State Board
Chapter 1.2 गुनगुनाते रहो
स्वाध्याय | Q ८. | Page 5
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