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विभाजन के खिलाफ़ महात्मा गाँधी की दलील क्या थी? - History (इतिहास)

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Question

विभाजन के खिलाफ़ महात्मा गाँधी की दलील क्या थी?

Long Answer

Solution

गाँधी जी प्रारंभ से ही देश के विभाजन के विरुद्ध थे। वह किसी भी कीमत पर विभाजन को रोकना चाहते थे। अतः वह अंत तक विभाजन का विरोध करते रहे। देश के विभाजन का विरोध करते हुए उन्होंने कहा था कि विभाजन उनकी लाश पर होगा। 7 सितम्बर, 1946 ई० को प्रार्थना सभा में अपने भाषण में गाँधी जी ने कहा था, “मैं फिर वह दिन देखना चाहता हूँ जब हिन्दू और मुसमलान आपसी सलाह के बिना कोई काम नहीं करेंगे। मैं दिन-रात इसी आग में जला जा रहा हूँ कि उस दिन को जल्दी-से-जल्दी साकार करने के लिए क्या करूं। लीग से मेरी गुजारिश है कि वे किसी भी भारतीय को अपना शत्रु न मानें…। हिन्दू और मुसलमान, दोनों एक ही मिट्टी से उपजे हैं; उनका खून एक है, वे एक जैसा भोजन करते हैं, एक ही पानी पीते हैं, और एक ही जबान बोलते हैं।” इसी प्रकार 26 सितम्बर, 1946 ई० को महात्मा गाँधी ने ‘हरिजन’ में लिखा था, “किन्तु मुझे विश्वास है कि मुस्लिम लीग ने पाकिस्तान की जो माँग उठायी है, वह पूरी तरह गैर-इस्लामिक है और मुझे इसको पापपूर्ण कृत्य कहने में कोई संकोच नहीं है। इस्लाम मानवता की एकता और भाईचारे का समर्थक है न कि मानव परिवार की एकजुटता को तोड़ने का।

जो तत्व भारत को एक-दूसरे के खून के प्यासे टुकड़ों में बाँट देना चाहते हैं, वे भारत और इस्लाम दोनों के शत्रु हैं। भले ही वे मेरी देह के टुकड़े-टुकड़े कर दें, किन्तु मुझसे ऐसी बात नहीं मनवा सकते, जिसे मैं गलत मानता हूँ।” किन्तु गाँधी जी का विरोध ‘नक्कार खाने में तूती’ के समान था। गाँधी जी सांप्रदायिक पूर्वाग्रहों और भावनाओं से जूझते रहे, किन्तु बेकार। अंततः देश का विभाजन हो गया और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को उसे स्वीकार करना पड़ा। सत्य और अहिंसा के पुजारी भग्नहृदय महात्मा गाँधी असहाय थे तथापि वे निरंतर सांप्रदायिक सद्भाव स्थापित करने के प्रयासों में लगे रहे। उन्हें विश्वास था कि वे अपने प्रयासों में सफल होंगे। लोग हिंसा और घृणा का रास्ता छोड़ देंगे और भाइयों के समान मिलकर सभी समस्याओं का समाधान कर लेंगे। गाँधी जी ने निडर होकर सांप्रदायिक दंगों से ग्रस्त विभिन्न स्थानों का दौरा किया और सांप्रदायिता के शिकार लोगों को राहत पहुँचाने के प्रयास किए। उन्होंने प्रत्येक स्थान पर अल्पसंख्यक समुदाय को (वह हिन्दू हो या मुसलमान) सांत्वना प्रदान की। उन्होंने भरसक प्रयास किया कि हिन्दू-मुसलमान एक-दूसरे का खून न बहाएँ अपितु परस्पर मिल-जुलकर रहें।

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Chapter 14: विभाजन को समझना - अभ्यास [Page 403]

APPEARS IN

NCERT History [Hindi] Class 12
Chapter 14 विभाजन को समझना
अभ्यास | Q 4. | Page 403
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