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विभिन्न प्रकार के ऋणपत्रों की व्याख्या कीजिए? - Accountancy (लेखाशास्त्र)

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Question

विभिन्न प्रकार के ऋणपत्रों की व्याख्या कीजिए?

Answer in Brief

Solution

एक कंपनी विभिन्न प्रकार के ऋणपत्र जारी कर सकती है, जिन्हें निम्नानुसार वर्गीकृत किया जा सकता है-

  • सुरक्षा के दृष्टिकोण से -
    1. रक्षित ऋणपत्र - रक्षित ऋणपत्रों का आशय उन ऋणपो्रों से है “जहाँ भुगतान की अदायगी न कर पाने की स्थिति के उद्देश्य से कंपनी की परिसंपत्तियों पर एक प्रभार स्थापित किया जाता है।” यह प्रभार स्थिर या चल हो सकता है। एक स्थिर प्रभार एक विशिष्ट परिसंपत्ति पर स्थापित किया जाता है जबकि चल प्रभार कंपनी को सामान्य परिसंपत्तियों पर स्थापित किया जाता है। स्थिर प्रभार उन 'परिसंपत्तियों के प्रति स्थापित किया जाता है जो कि कंपनी के द्वारा प्रचालन के लिए धारित होते है न कि बिक्रो के आशय के लिए जबकि चल प्रभारों के अंतर्गत वे सभी परिसंपत्तियाँ शामिल होती हैं जो सुरक्षित लेनदारों हेतु निर्दिष्ट होने से बहिष्कृत हैं।
    2. अरक्षित ऋणपत्र - अरक्षित ऋणपत्रों का कंपनी की परिसंपत्तियों पर एक विशिष्ट प्रभार नहीं होता है। हालाँकि, इन ऋणों पर स्वत: हो एक चल प्रभार स्थापित किया जा सकता है। सामान्यतः इस प्रकार के ऋणपत्र जारी नहीं किए जाते हैं।
  • अवधि के दृष्टिकोण से -
    1. मोचनीय ऋणपक्र - मोचनीय ऋणपत्र वे होते हैं जो एक विशिष्ट अवधि की समाप्ति पर एकमुश्त राशि के रूप में या कंपनी के जीवन के दौरान किस्तों में देय होते हैं। इन ऋणपत्रों को सममूल्य 'पर या अधिलाभ राशि पर मोचित किया जा सकता हैं। 
    2. अमोचनीय ऋणपत्र - अमोचनौय ऋणपत्रों को 'स्थायी' ऋणपत्र के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि कंपनी इस प्रकार के ऋणपत्रों के निर्मम द्वारा उधार प्राप्त द्रव्य के परिशोधन के लिए भी बचन नहीं देती है। ये ऋणपत्र कंपनी की समाप्ति पर या एक दीर्घकालिक अवधि की समाप्ति पर 'शोधनीय होते हैं।
  • परिवर्तनीयता के दृष्टिकोण से -
    1. परिवर्तनीय ऋणपत्र - ये वे ऋणपत्र हैं जो समता अंश में परिवर्तनीय होते हैं या फिर किसी भी अन्य प्रतिभूति में या तो कंपनी के विकल्प पर या ऋणपत्र धारक के विकल्प पर परिवर्तित होते हैं, इन्हें परिवर्ततीय ऋणपत्र कहते हैं। ये ऋणपत्र पूर्णतः परिवर्तनीय हो सकते हैं या ऑंशिक 'परिवर्तनीय हो सकते हैं।
    2. अपरिवर्तनीय ऋणपत्र - ये वे ऋणपत्र हैं जिन्हें अंश में परिवर्तित नहीं किया जा सकता या किसी अन्य प्रतिभूति में नहीं बदला जा सकते हैं। इन्हें अपरिवर्तनीय ऋणपत्र कहते हैं। कंपनियों द्वार 'निर्मेमित किए जाने वाले अधिकतर ऋणपत्र इसी श्रेणी में आते हैं।
  • कूपन दर के दृष्टिकोण से -
    1. विशिष्ट कृपन दर ऋणपत्र - ये ऋणपत्र विशिष्ट व्याज दर पर जारी किए जाते हैं जिसे 'कूपन 'दर' कहा जाता है। ये विशिष्ट दरें या तो स्थिर हो सकती हैं या चल (अस्थिर)। चल ब्याज दरों को प्रायः बैंक की दर के साथ जोड़ा जाता है।
    2. शून्य कूपन दर ऋणपत्र - ये ऋणपत्र ब्याज कौ कोई विशिष्ट दर वहन नहीं करते हैं। निवेशकों 'की क्षतिपूर्ति करने की दृष्टि से इस प्रकार के ऋणपत्र पर्वाप्त बट्टे (छूट) के साथ जारी किए जाते हैं और सांकेतिक मूल्य तथा निर्गम मूल्य के बीच अंतर को ब्याज की राशि के रूप में निरूपित किया जाता है जो ऋणपत्र की कालावधि से संबंधित होती है।
  • पंजीकरण के दृष्टिकोण से -
    1. पंजीकृत ऋणपत्र - पंजीकृत ऋणपत्र वे ऋणपत्र हैं जिन्हें कंपनी द्वारा रखे गए एक रजिस्टर में नाम, पता तथा ऋणपत्र धारकता की विशिष्टताओं के सभी विवरणों सहित प्रविष्ट किया जाता है। ऐसे ऋणपत्रों का हस्तांतरण केवल एक नियमित हस्तांतरण विलेख के कार्यान्वयन द्वारा किया जा सकता है।
    2. वाहक ऋणपत्र - वाहक ऋणपत्र वे ऋणपत्र हैं जो डिलीवरी या सुपुर्दगी के द्वारा हस्तांतरित किए जा सकते हैं और कंपनी ऋणपत्रों का कोई रिकॉर्ड नहीं रखती है। ऋणप्रों पर ब्याज का भुगतान उस व्यक्ति को किया जाता है जो इस प्रकार के ऋणपत्रों में संलग्न ब्याज कूपन को प्रस्तुत करता है।
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ॠणपत्रों के प्रकार
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Chapter 2: ॠणपत्रों का निर्गम एवं मोचन - अभ्यास हेतु प्रश्न [Page 143]

APPEARS IN

NCERT Accountancy - Company Accounts and Analysis of Financial Statements [Hindi] Class 12
Chapter 2 ॠणपत्रों का निर्गम एवं मोचन
अभ्यास हेतु प्रश्न | Q 1.2 | Page 143
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