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वन और वन्य जीव संरक्षण में लोगों की भागीदारी कैसे महत्त्वपूर्ण है? - Geography (भूगोल)

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Question

वन और वन्य जीव संरक्षण में लोगों की भागीदारी कैसे महत्त्वपूर्ण है?

Answer in Brief

Solution

वन और वन्य जीव संरक्षण में लोगों की भागीदारी काफी महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि वन्य जीवों का सबसे अधिक नुकसान आम लोगों द्वारा ही किया जाता है। आम लोग ही वन्य जीवों का शिकार करते हैं। लेकिन सरकार ने वन्य जीवों के संरक्षण के लिए 1972 ई. में वन्य प्राणी अधिनियम बनाया, जिसमें वन्य जीवों को मारने वाले को कठोर सजा का प्रावधान किया गया है। तब से लोगों ने वन्य जीवों का शिकार काफी कम कर दिया है। देश में कई सामाजिक संगठनों और समुदायों ने वन्य जीवों के संरक्षण के लिए काफी महत्त्वपूर्ण कार्य किए हैं। राजस्थान के विश्नोई जनजाति के लोग खेजड़ी वृक्ष और काले हिरण की रक्षा करते हैं। राजस्थान के अलवर जिले में 5 गाँवों के लोगों ने 1200 हेक्टेयर वन भूमि को ‘भैरोदेव डाकव सेंचुरी’ घोषित कर दिया है, जिसके अपने ही नियम कानून है जो शिकार वर्जित करते हैं तथा बाहरी लोगों की घुसपैठ से यहाँ के वन्य जीवन को बचाते हैं। हिमालय में वनों की रक्षा के लिए चिपको आंदोलन चलाया गया था।

कुछ समाज कुछ विशेष पेड़ों की पूजा करते हैं और आदिकाल से उनका संरक्षण करते आ रहे हैं। छोटानागपुर क्षेत्र में मुंडा और संथाल जनजातियाँ महुआ और कदंब के पेड़ों की पूजा करते हैं। ओडिशा और बिहार की जनजातियाँ शादी के दौरान इमली और आम के पेड़ की पूजा करती हैं। भारत में संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम क्षरित वनों के प्रबंध और पुनर्निर्माण में स्थानीय समुदायों की भूमिका के महत्त्व को उजागर करते हैं। औपचारिक रूप में इन कार्यक्रमों की शुरुआत 1988 में हुई जब ओडिशा राज्य ने संयुक्त वन प्रबंधन का पहला प्रस्ताव पास किया। इसके तहत गाँव वाले और वन विभाग मिलकर वनों की रक्षा करते हैं।

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वन संरक्षण
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Chapter 5: प्राकृतिक वनस्पति - अभ्यास [Page 70]

APPEARS IN

NCERT Geography - India: Physical Environment [Hindi] Class 11
Chapter 5 प्राकृतिक वनस्पति
अभ्यास | Q 3. (ii) | Page 70
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