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वृत्तांत-लेखन: (05) विवेकानंद विद्यालय, सोलापुर में संपन्न 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान का रोचक वृत्तांत लेखन ६० से ८० शब्दों में लिखिए। -

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Question

1. वृत्तांत-लेखन: (05)

विवेकानंद विद्यालय, सोलापुर में संपन्न 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान का रोचक वृत्तांत लेखन ६० से ८० शब्दों में लिखिए।
(वृत्तांत में स्थल, काल, घटना का उल्लेख होना अनिवार्य है।)

अथवा 

कहानी-लेखन:(05)

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर लगभग ७० से ८० शब्दों में कहानी लिखकर उचित शीर्षक दीजिए तथा सीख लिखिए:
एक गाँव – पीने के पानी की समस्या – दूर-दूर से पानी लाना – सभी लोग परेशान – सभा का आयोजन – मिलकर श्रमदान का निर्णय – दूसरे दिन से – केवल एक आदमी – काम में जुटना – धीरे-धीरे एक-एक का आना – सारा गाँव श्रमदान में – गाँव के तालाब की सफाई – कीचड़, प्लास्टिक निकालना – बरसात में तालाब का स्वच्छ पानी से भरना।

2. विज्ञापन-लेखन: (05)

निम्नलिखित जानकरी के आधार पर ५० से ६० शब्दों में विज्ञापन तैयार कीजिए:

स्कूल बस के लिए ड्राइवर चाहिए
शैक्षिक अर्हता अनुभव व्यावसायिक अर्हता वेतन संपर्क:
महात्मा
हिंदी विद्यालय,
पुणे।
मो. नं. 2332422409
Answer in Brief

Solution

1. सोलापुर। विवेकानंद विद्यालय ने बेटियों की सुरक्षा व शिक्षा के प्रति सभी को जागरूक करने के लिए २२ जनवरी, २०२० को 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान का आयोजन किया था। सुबह नौ बज विद्यालय के सभागृह में कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हेतु उपस्थित महिमा कन्या विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती उषा शर्मा जी का जोरदार तालियों से स्वागत किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य राजपाल सिंह व अतिथि महोदया द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। उसके बाद विद्यार्थियों द्वारा माता सरस्वती की वंदना की गई।
प्रधानाचार्य ने अतिथि महोदय का संक्षिप्त परिचय दिया व एक पुस्तक भेंट में देकर उन्हें सम्मानित किया। उसके बाद अतिथि महोदया ने ५० प्रितभाशाली व पढ़ाई में बुद्धिमान छात्राओंको छात्रवृत्ति देने की घोषणा की तथा सभी छात्राओंको उपहार में पुस्तकें बाँटी। फिर अतिथि महोदया ने अपने वक्तव्य से सभी छात्राओंको शिक्षा प्रप्त करके देश की उन्नति में सहयोग देने के लिए प्रेरित किया। उसके बाद विद्यालय के छात्र-छात्राओंने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' इस घोषवाक्य पर आधारित एक सुंदर नाटक की प्रस्तुति की। बेटी को बोझ न समझकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना ही इस नाटक का प्रमुख संदेश था।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य जी ने अतिथि महोदया और सभी छात्राओंक प्रित आभार प्रकट किया। अत: दोपहर एक बजे इस कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन किया गया।

अथवा

एकता में शक्ति होती है

शीतपुर नामक एक गाँव था। गाँव के सभी लोग हमेशा अपने - अपने काम में व्यस्त रहते थे। गाँव में एक तालाब था, जो गर्मियों में सूख गया था। तालाब सूखने की वजह से लोगों को पीने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा था। सभी गाँववासी दूर-दूर जाकर पानी की खोज करते और बाल्टी, मटके आदि में पीने का पानी भरकर लाते थे। रोज-रोज उतनी दूर से पानी भरकर लाने से वे इतने थक जाते थे कि उनके लिए कोई अन्य काम करना मुश्किल हो जाता था। पानी की इस समस्या से सभी लोग बहुत परेशान थे।
गाँव के लोगों ने इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए एक सभा का अयोजन किया। उसमें एक आदमी ने सभी से कहा, ’यदि हमारे गाँव का तालाब सूखा नहीं होता, तो हमें पानी लाने दूर तक नहीं जाना पड़ता।
अत: मेरे विचार से हमें गाँव के ही तालाब की सफाई करवानी चाहिए। बरसात का मौसम आने वाला है। यदि हम उससे पहले मिलकर तालाब की सफाई कर लेते हैं, तो बरसात का पानी स्वच्छ तालाब में एकत्रित हो जाएगा, उस पानी का उपयोग हम पीने के लिए कर सकते हैं।“ उस आदमी की बात से सभी ने सहमत होकर तालाब की सफाई में श्रमदान करने का निर्णय लिया।
दूसरे दिन तय किए गए समय पर वह आदमी तालाब के पास सभी गाँववासियों का इंतजार कर रहा था। काफी समय तक इंतजार करने के बाद भी जब कोई नहीं आया तब वह आदमी समझ गया कि इस कार्य में गाँववाले उसकी कोई सहायता नहीं करेंगे। वह अकेले ही तालाब की सफाई के काम में जुट गया। आने-जाने वाले लोगों ने जब उस आदमी को अकेले ही तालाब की सफाई करते देखा, तो वे भी उसकी मदद के लिए तुरंत वहाँ पहुँच गए। धीरे-धीरे एक-एक करके काफी लोग तालाब की सफाई में जुट गए। उन्हें देखकर सारा गाँव इस काम के लिए प्रेरित हुआ और इस कार्य में अपना श्रमदान देने के लिए तैयार हुआ। कुछ लोगों ने तालाब से कीचड़ निकालने का कार्य किया तो कुछ लोगों ने तालाब में एकत्रित प्लास्टिक व कूड़ा-कचरा निकालने का कार्य किया। देखते-हीदेखते पूरे गाँववालों के श्रमदान से कुछ ही दिनों में तालाब पूरी तरह साफ हो गया।

कुछ दिनों बाद बरसात का मौसम आया और झमाझम बरसात हुई। गाँव का तालाब स्वच्छ पानी से लबालब भरकर बहने लगा, जिसकी वजह से गाँव में पानी की समस्या का निदान हुआ। गाँववालों की एकता के कारण ही उन्हें इस समस्या से हमेशा के लिए छुटकारा मिल गया था।

सीख: मिल-जुलकर काम करने से किसी भी समस्या का हल आसानी से निकाला जा सकता है।

2.

 

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