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यदि बोर का क्वांटमीकरण अभिगृहीत ( कोणीय संवेग nhnh2π प्रकृति का मूल नियम है तो यह ग्रहीय गति की दशा में भी लागू होना चाहिए। तब हम सूर्य के चारों ओर ग्रहों की कक्षाओं के - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

यदि बोर का क्वांटमीकरण अभिगृहीत ( कोणीय संवेग `"nh"/(2pi)` प्रकृति का मूल नियम है तो यह ग्रहीय गति की दशा में भी लागू होना चाहिए। तब हम सूर्य के चारों ओर ग्रहों की कक्षाओं के क्वांटमीकरण के विषय में कभी चर्चा क्यों नहीं करते?

Numerical

Solution

माना हम बोर के क्वांटम सिद्धान्त को पृथ्वी की गति पर लागू करते हैं। इसके अनुसार

`"mvr" = "n" "h"/(2pi) => "n" = (2pi "mvr")/"h"`

पृथ्वी के लिए m = 6.0 × 1024 kg, v = 3 × 1024 ms-1 

r = 1.49 × 1011 m, h = 6.62 × 10-34 Js

`therefore "n" = (2 xx 3.14 xx 6.0 xx 10^24 xx 3 xx 10^4 xx 1.49 xx 10^11)/(6.62 xx 10^-34)`

⇒ n = 2.49 × 1074 

⇒ n ≈ 1074

∴ n का मान बहुत अधिक है; अत: इसका यह अर्थ हुआ कि ग्रहों की गति से सम्बद्ध कोणीय संवेग तथा ऊर्जा `"h"/(2pi)` की तुलना में अत्यंत बड़ी हैं। n के इतने उच्च मान के लिए, किसी ग्रह के बोर मॉडल के दो क्रमागत क्वांटमीकृत ऊर्जा स्तरों के बीच ग्रह के कोणीय संवेग तथा ऊर्जाओं के अन्तर किसी ऊर्जा स्तर में ग्रह के कोणीय संवेग तथा ऊर्जा की तुलना में नगण्य हैं, इसी कारण ग्रहों की गति में ऊर्जा स्तर क्वांटमीकृत होने के स्थान पर सतत प्रतीत होते हैं।

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बोर के क्वांटमीकरण के द्वितीय अभिगृहीत का दे ब्रॉग्ली द्वारा स्पष्टीकरण
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Chapter 12: परमाणु - अभ्यास [Page 439]

APPEARS IN

NCERT Physics [Hindi] Class 12
Chapter 12 परमाणु
अभ्यास | Q 12.16 | Page 439
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