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आपातकाल के बाद के दौर में भाजपा एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरी इस दौर में इस पार्टी के विकास - क्रम का उल्लेख करें। - Political Science (राजनीति विज्ञान)

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प्रश्न

आपातकाल के बाद के दौर में भाजपा एक महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में उभरी इस दौर में इस पार्टी के विकास - क्रम का उल्लेख करें।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

  1. आपातकाल के दौरान भाजपा नाम की कोई पार्टी अस्तित्व में नहीं थी। 1977 में बनी पहली विपक्ष पार्टी जनता पार्टी की सरकार में भारतीय जनसंघ का प्रतिनिधित्व अवश्य था। कालांतर में 1980 में भारतीय जनसंघ को समाप्त कर भारतीय जनता पार्टी का गठन किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी इसके संस्थापक अध्यक्ष बने।
  2. श्रीमती इंदिरा गाँधी की हत्या 1984 में कर दी गई। चुनावों में कुछ सहानुभूति की लहर होने के कारण कांग्रेस को जबरदस्त सफलता मिली जबकि भारतीय जनता पार्टी को केवल दो सीटें ही प्राप्त हुई। स्वयं अटल बिहारी वाजपेयी ग्वालियर से चुनाव हार गए। सफलता ने अभी भाजपा के कदम नहीं चूमे थे। इस बीच रामजन्म - भूमि की ताला खुलने का अदालती आदेश आ चूका था। कांग्रेस सरकार ने वहाँ का ताला खुलवाया। भाजपा ने इसका राजनितिक लाभ उठाने का फैसला किया।
  3. 1989 के चुनावों में इसे आशा से अधिक सफलता मिली और इसने कांग्रेस का विकल्प बनने की इक्छा शक्ति दिखाई। जो भी हो कांग्रेस से बहार हुए वी. पी. सिंह ने जनता दल का गठन किया तथा 1989 के चुनाव लड़े। उन्हें पूर्ण बहुमत नहीं मिली पर भाजपा ने उन्हें बाहर से समर्थन देकर संयुक्त मोर्चा की सरकार का गठन कराया। भाजपा के नेता लालकृष्ण अडवाणी ने हिंदुत्व तथा राम मंदिर के मुद्दे को लेकर एक रथ यात्रा का आयोजन किया। यह यात्रा जब बिहार से गुजर रही थी तो तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने इसे रोक दिया। भाजपा ने इस मुद्दे पर केंद्र से समर्थन वापस ले लिया और वी. पी. सिंह की सरकार जाती रही।
  4. भाजपा ने 1991 तथा 1996 के चुनावों में अपनी स्थिति लगातार मजबूत की। 1996 के चुनावों में यह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इस नाते भाजपा को सरकार बनाने का न्योता मिला। लेकिन अधिकांश दल भाजपा की कुछ नीतियों के खिलाफ थे और इस वजह से भाजपा की सरकार लोकसभा में बहुमत प्राप्त नहीं कर सकी। आख़िरकार भाजपा एक गठबंध न (राष्ट्रिय जनतांत्रिक गठबंधन - राजग) के अगुआ के रूप में सत्ता में आयी और 1998 के मई से 1999 के जून तक सत्ता में रहीं। फिर, 1999 में इस गठबंधन ने दोबारा सत्ता हासिल की। राजग की इन दोनों सरकारों में अटल बिहारी वाजपेयी प्रधनमंत्री बने। 1999 की राजग सरकार ने अपना निर्धारित कार्यकाल पूरा किया। 2004 में पुनः चुनाव को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
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गठबंधन का युग
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अध्याय 9: भारतीय राजनीति : नए बदलाव - प्रश्नावली [पृष्ठ १९४]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Political Science [Hindi] Class 12
अध्याय 9 भारतीय राजनीति : नए बदलाव
प्रश्नावली | Q 5. | पृष्ठ १९४

संबंधित प्रश्न

उन्नी - मुन्नी ने अखबार की कुछ कतरनों को बिखेर दिया है। आप उन्हें कालक्रम के अनुसार व्यवस्थित करें:

  1. जनता दल का गठन
  2. बाबरी मस्ज़िद का विध्वंस
  3. इंदिरा गाँधी की हत्या
  4. राजग सरकार का गठन
  5. सेंप्रग सरकार का गठन
  6. गोधरा की दुर्घटना और उसके परिणाम

निम्नलिखित में मेल करें:

(क) सर्वानुमति की राजनीती (i) शाहबानो मामला
(ख) जाति आधारित दल (ii) अन्य पिछड़ा वर्ग का उभार
(ग) पर्सनल लॉ और लोगिक न्याय (iii) गठबंधन सरकार
(घ) क्षेत्रीय पार्टियों की बढ़ती ताकत (iv) आर्थिक नीतियों पर सहमति

1989 के बाद की अवधि में भारतीय राजनीति के मुख्य मुद्दे क्या रहे हैं? इन मुद्दों से राजनितिक दलों के आपसी जुड़ाव के क्या रूप सामने आए हैं?


"गठबंधन की राजनीति के इस नए दौर में राजनीतिक दल विचारधारा को आधार मानकर गठजोड़ नहीं करते हैं।" इस कथन के पक्ष या विपक्ष में आप कौन - से तर्क देंगे।


कांग्रेस के प्रभुत्व का दौर समाप्त हो गया है। इसके बावजूद देश की राजनिति पर कांग्रेस का असर लगातार कायम है। क्या आप इस बात से सहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।


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