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प्रश्न
कांग्रेस के प्रभुत्व का दौर समाप्त हो गया है। इसके बावजूद देश की राजनिति पर कांग्रेस का असर लगातार कायम है। क्या आप इस बात से सहमत हैं? अपने उत्तर के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर
हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ की यद्धपि कांग्रेस का पतन हो गया है या कहिए की उसका केंद्र एवं अधिकांश प्रांतों में जो राजनैतिक सत्ता का असर आजादी से लेकर 1960 तक कायम रहा वह अब वैसा नहीं दिखाई देता तथापि वह आज भी लोकसभा में सबसे बड़ा दल है। उसी का अध्यक्ष संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (सप्रंग) का अध्यक्ष है और उसी का प्रधानमंत्री है। अनेक राज्यों में आज भी वह सत्ता में हैं। लेकिन देश का राजनैतिक इतिहास इस बात का गवाह है की 1960 के दशक के अंतिम सालों में कांग्रेस के एक छात्र राज को चुनौती मिली थी लेकिन इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में कांग्रस ने भारतीय राजनीती पर अपना प्रभुत्व फिर से कायम किया। नब्बे के दशक में कांग्रेस की अग्रणी हैसियत को एक बार फिर चुनौती मिली। जो भी हो, इसका मतलब यह नहीं की कांग्रेस की जगह कोई दूसरी पार्टी प्रमुख हो गई। अभी भी कांग्रेस पार्टी देश की सबसे बड़ी और पुरानी पार्टी मानी जाती है। 2004 के चुनावों में कांग्रेस भी पुरे जोर के साथ गठबंध न में शामिल हुई। राजग की हार हुई और संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की सरकार बनी। इस गठबंधन का नेतृत्व कांग्रेस ने किया। संप्रग को वाम मोर्चा ने समर्थन दिया। 2004 के चुनावों में एक हद तक कांग्रेस का पुनरुत्थान भी हुआ। 1991 के बाद इस दफे पार्टी के सीटों की संख्या एक बार फिर बढ़ी। जो भी हो, 2004 के चुनावों में राजग और संप्रग को मिले कुल वोटों का अंतर् बड़ा कम था। 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस ने फिर अपनी पुरानी रंगत दिखाई और पहले से काफी अधिक सीटों पर जीत हासिल की। यद्यिपी उसे सहयोगियों की अभी भी आवश्यकता है।
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