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आपके बड़े होने के अनुभव, समोआ के बच्चों और किशोरों के अनुभव से किस प्रकार भिन्न हैं? इन अनुभवों में वर्णित क्या कोई ऐसी बात है, जिसे आप अपने बड़े होने के अनुभव में शामिल करना चाहेंगे? - Social Science (सामाजिक विज्ञान)

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प्रश्न

आपके बड़े होने के अनुभव, समोआ के बच्चों और किशोरों के अनुभव से किस प्रकार भिन्न हैं? इन अनुभवों में वर्णित क्या कोई ऐसी बात है, जिसे आप अपने बड़े होने के अनुभव में शामिल करना चाहेंगे? 

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

जब हम छोटे थे तो हमारी देखभाल माता-पिता करते थे और यह सिलसिला किशोरावस्था के बाद तक चलता रहा और युवावस्था में जाकर खत्म हुआ। जबकि समोआ में छोटे बच्चे जैसे ही चलना शुरू क्र देते थे, उनकी माताएँ या बड़े लोग उनकी देखभाल करना बंद क्र देते थे। यह जिम्मेदारी बड़े बच्चों पर आ जाती थी, जो प्रायः स्वयं भी पाँच वर्ष के आस-पास की उम्र के होते थे। लड़के-लड़कियाँ दोनों अपने छोटे भाई बहनों की देखभाल करते थे, लेकिन जब कोई लड़का लगभग नौ वर्ष का हो जाता था वह बड़े लड़कों के समूह में सम्मिलित हो जाता था और बाहर के काम सीखता था, जैसे-मछली पकड़ना और नारियल के पेड़ लगाना। लड़कीयाँ जब तक तेरह चौदह साल की नहीं हो जाता थीं, वे अधिक स्वतंत्र होती थीं। लगभग चौदह वर्ष की उम्र के बाद भी वे भी मछली पकड़ने जाती थीं, बागानों में काम करती थीं और डलिया बुनना सीखती थीं। साथ-ही-साथ खाना बनाने का भी काम करती थीं। 

ये सभी अनुभव हमारे जीवन में नहीं देखने को मिले, क्योंकि भारत में बच्चे लगभग 20 वर्ष के बाद ही कमाना शुरू करते हैं, कुछ बच्चे मजबूरीवश इससे कम उम्र में भी काम करना शुरू क्र देते हैं।

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1920 के दशक में समोआ द्वीप में बच्चों का बड़ा होना
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अध्याय 4: लड़के और लड़कियों के रूप में बड़ा होना - अभ्यास [पृष्ठ ४५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Social Science - Social and Political Life 2 [Hindi] Class 7
अध्याय 4 लड़के और लड़कियों के रूप में बड़ा होना
अभ्यास | Q 1. | पृष्ठ ४५

संबंधित प्रश्न

दिए गए कथन पर विचार कीजिए और बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य? अपने उत्तर के समर्थन में एक उदाहरण भी दीजिए। 

सभी समुदाय और समाजों में लड़कों और लड़कियों की भूमिकाओं के बारे में एक जैसे विचार नहीं पाए जाते।


दिए गए कथन पर विचार कीजिए और बताइए कि वे सत्य हैं या असत्य? अपने उत्तर के समर्थन में एक उदाहरण भी दीजिए।

हमारा समाज बढ़ते हुए लड़कों और लड़कियों में कोई भेद नहीं करता। 


ऐसे विशेष खिलौनों की सूची बनाइए, जिनसे लड़के खेलते हैं और ऐसे विशेष खिलौनों की भी सूची बनाइए, जिनसे केवल लड़कियाँ खेलती हैं। यदि दोनों सूचियों में अंतर है, तो सोचिए और बताइए कि ऐसा क्यों है? सोचिए कि क्या इसका कुछ संबंध इस बात से हैं कि आगे चलकर वयस्क के रूप में बच्चों को क्या भूमिका निभानी होगी?


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