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प्रश्न
‘अंतःप्रेणा से ही जीवन का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है’ - स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
जीवन में कोई भी सफलता अर्जित करने के लिए सबसे पहला कदम आपके द्वारा अपने लक्ष्यों का निर्धारण करना होता है। लक्ष्य निर्धारण एक ऐसी गतिविधि है जिसके लिए आपको पर्याप्त समय देने की आवश्यकता होती है और यही आपके समय का सदुपयोग है। आपको अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए अनुकूल प्रयास करना चाहिए और आपका प्रयास आपके लक्ष्यों के अनुरूप होना चाहिए। मनुष्य को सपने देखना चाहिए। आपको अपने उन लक्ष्यों की पहचान करनी पड़ेगी जिन्हें आप चेतन एवं अवचेतन दोनों ही अवस्थाओं में प्राप्त करने की कोशिश करते रहते हैं। आप अपने प्रत्येक लक्ष्यों को महत्व देते हैं और आप अपने सभी लक्ष्यों को अपने संबंधित समय सीमा में हासिल करना चाहते हैं। यदि आप अपने लक्ष्यों के प्रति सचेत हैं और आपके लक्ष्य स्पष्ट हैं तो आप अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयासों का बिल्कुल सटीक विवरण दे सकते हैं। यदि आप अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए एक समयवधि निर्धारित करते हैं, तो आपको यथासंभव सावधानी पूर्वक उसका पालन करना होगा। उन सपनों को पूरा करने के लिए उसे अपने मन में आत्मविश्वास पैदा करना चाहिए। जिसके पास आत्मविश्वास का बल होता है, वह पराजय के क्षणों में विचलित नहीं होता, बल्कि नए संकल्प और उत्साह से आगे बढ़कर अंततः विजय प्राप्त करता है।
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भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
आकृति पूर्ण कीजिए:
भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
परिच्छेद से प्राप्त प्रेणा लिखिए।
भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
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आकृति पूर्ण कीजिए:-
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प्रवाह तालिका पूर्ण कीजिए:-
आप अपने सहपाठियों के साथ किसी पर्वतारोहण के लिए गए थे । वहाँ के रोमांचक अनुभव को शब्दबद्ध कीजिए।