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प्रश्न
‘हिमालय पर्वत की बर्फ पिघलकर खत्म हो जाए तो’ इसपर अपने विचार लिखिए।
उत्तर
हिमालय एक पर्वत श्रृंखला है, जो दुनिया की कई सबसे ऊँची चोटियों का घर है। भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, भूटान और नेपाल से गुजरते हुए, भूगोल का यह अविश्वसनीय विस्तार एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और पारिस्थितिक स्थान है। हालाँकि, जलवायु परिवर्तन से क्षेत्र को ख़तरा है, और हिमालय के ग्लेशियरों के पिघलने के प्रभाव विनाशकारी हो सकते हैं। हिमालय में अनेक नदियों का जन्म होता है। यदि उसकी बर्फ पिघलना बंद हो जाए तो हमारी नदियाँ सूख जाएँगी। हम नदियों से होने वाले अनेक लाभों से वंचित रहकर जीवन व्यतीत कर रहें होंगे। फसल के लिए पानी और उपजाऊ मिट्टी भी उपस्थित नहीं होगी। जल से उत्पन्न होने वाली बिजली किसी को प्राप्त नहीं होगी। बर्फ एकत्र होने से हिमालय की ऊँचाई बढती जाएगी जो एक समस्या बन सकती है। वहां का क्षेत्र इतना ठंडा हो जाएगा कि लोगों का वहां रहना दूभर हो जाएगा। जैसे-जैसे अधिक पिघला हुआ पानी जल प्रणाली में प्रवेश करता है, प्रोग्लेशियल हिमनद झीलें बनती हैं। अधिक पानी और गर्म वैश्विक तापमान के साथ, चरम मौसम की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ग्लोबल वार्मिंग का मतलब है कि साल की शुरुआत में बर्फ और ग्लेशियर पिघलते हैं, जिससे वसंत ऋतु में बाढ़ आती है। पिघलते हिमालयी ग्लेशियर अनगिनत लाखों लोगों की आजीविका को वास्तविक नुकसान पहुँचा सकते हैं।
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भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
आकृति पूर्ण कीजिए:
भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
परिच्छेद से प्राप्त प्रेणा लिखिए।
भारत में आकर हालात फिर वही थे। एवरेस्ट के लिए जितने पैसे आवश्यक थे उतने मेरे पास नहीं थे। आखिर मेरे पिता जी ने अपना घर गिरवी रखा। माँ और बहनों ने अपने गहने बेच दिए और जीजा जी ने ऋण ले लिया। सब कुछ दाँव पर लगाकर मैं एवरेस्ट चढ़ाई के लिए निकल पड़ा। काठमांडू से एवरेस्ट जाते समय ‘नामचे बाजार’ से एवरेस्ट शिखर का प्रथम दर्शन हुए। मैंने पुणे की टीम ‘सागरमाथा गिर्यारोहण संस्था’ के साथ इस मुहीम पर था। बहुत जल्द हमने १९००० फीट पर स्थित माउंट आयलैड शिखर पर चढ़ाई की। इसके बाद हम एवरेस्ट बेसकैंप में पहुँचे। चढ़ाई के पहले पड़ाव पर सागरमाथा संस्था के अध्यक्ष रमेश गुळवे जी को पक्षाघात का दौरा पड़ा। उन्हें वैद्यकीय उपचार के लिए काठमांडू से पूना ले गए किंतु उनका देहांत हो गया। मैं और मेरे सााथियों पर मानो दुख का एवरेस्ट ही टूट पड़ा। फिर भी हमने आगे बढ़ने का निर्णय लिया। |
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आकृति पूर्ण कीजिए:-
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