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प्रश्न
असम आंदोलन सांस्कृतिक अभियान और आर्थिक पिछड़ेपन की मिली - जुली अभिव्यक्ति था। व्याख्या कीजिए।
उत्तर
असम आंदोलन: उत्तर - पूर्व के क्षेत्रों, विशेपकर असम राज्य में बाहरी लोगों के विरुद्ध आंदोलन हुआ है। बाहरी लोगों से अभिप्राय केवल विदेशी नहीं बल्कि वे सभी लोगो को यहा की जनता बाहरी लोग कह कर पुकारती है। असम राज्य में बाहरी लोगों को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता रहा हैं। इसका एक उदाहरण महाराष्ट्र है जहाँ का क्षेत्रीय दल शिव सेना खुले तौर पर कहता है की "मुंबई केवल मुंबई वालों के लिए" सन 2007 में भी महाराष्ट्र के कई क्षेत्रों में बिहार, उड़ीसा आदि राज्यों में आए लोगों के साथ मारपीट की गई और एक बार तो रेलवे की भर्ती से संबधित होने वाली परीक्षा में बहार से आए उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठने ही नहीं दिया गया। एक बार दिल्ली की मुख्यमंत्री ने भी कहा था की दिल्ली की बुरी अवस्था, पानी, बिजली, बस सेवा कानून - व्यवस्था आदि के लिए बाहरी लोग उत्तरदायी है और जो बहार से आते हैं यही बस जाते हैं। बाहरी लोगों के विरोध पर आधारित असम का छात्र आंदोलन ऐसे ही आंदोलनों में प्रमुख कहा जा सकता है। यह आंदोलन लगभग ६ वर्ष तक चला और अंत में असम समझौते के आधार पर समाप्त हुआ। यह आंदोलन 1978 में आरंभ हुआ था और 1985 में समाप्त हुआ। असम में देश के दूसरे क्षेत्रों से आए लोगों के खिलाफ वहाँ के लोगों का गुस्सा इतना अधिक नहीं था जितना की बांग्लादेश से अवैध रूप से भारत आए विदेशियों के कारण था। इन बांग्लादेशियों ने यहाँ आकर स्थानीय तथा क्षेत्रीय सुविधओं पर दबाव पड़ने के साथ - साथ यहाँ के लोगों को यह खतरा महसूस होने लगा था की वे इनकी बढ़ती हुई संख्या के कारण अल्पमत में आ जाएंगे। असम में तेल के भंडार थे, कोयले की खाने थी और चाय के बागान थे फिर भी लोगों की आर्थिक दशा अच्छी नहीं थी और गरीब वातावरण था।
सरकार इन विदेशियों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं करती थी क्योंकि ये बाहरी लोग कांग्रेस के वोट बैंक की भूमिका निभाते थे। लोगों को विश्वास हो गया था की राज्य के प्राकृतिक संसाधानों का लाभ असम के लोगों को नहीं मिलता बल्कि बाहरी लोगों को होता है। उसनमे धरती पुत्र की भावना जागृत और और विकसित हुई। अर्थात असम केवल असम के मोलिकवासियों के लिए है, बाहरी लोगों के लिए नहीं और बाहरी लोगों को असम से बाहर निकाला जाए। 1979 में वहाँ युवा छात्रों ने अपना एक संगठन ऑल स्टूडेंट्स यूनियन (आसु) बनाया और बाहरी लोगों का विरोध शुरू किया। शीघ्र ही इस संगठन को वहाँ की जनता का व्यापक समर्थन प्राप्त हुआ। इस आंदोलन की मुख्य माँगे थी -
- बांग्लादेश से अवैध रूप से आए लोगों को वापस बांग्लादेश भेजा जाए।
- यह भी माँग थी की 1951 के बाद जितने भी लोग विदेश या देश के अन्य सिस्सों से असम आए हैं उन्हें वापस भेजा जाए।
- असम में गैर क़ानूनी तौर पर दर्ज किए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जाएँ।
- असम राज्य में गैर - असमी लोगों के दबदबे को समाप्त किया जाए और राज्य प्रशासन में असम के लोगों की भागीदारी होनी चाहिए।
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