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प्रश्न
हर क्षेत्रीय आंदोलन अलगाववादी माँग की तरफ अग्रसर नहीं होता। इस अध्याय से उदाहरण देकर इस तथ्य की व्याख्या कीजिए।
उत्तर
प्रेत्यक क्षेत्रीय अलगाववादी माँग की ओर अग्रसर नहीं होता: किसी भी समाज में क्षेत्रीय आकांक्षाओं का उभरना स्वाभाविक होता है और क्षेत्र के लोग उनकी पूर्ति की माँग करने लगते हैं। केंद्रीय सरकार राष्ट्र के सभी क्षेत्रों का एक जैसा विकास नहीं कर सकती और सबको समान सुविधएँ उपलब्ध नहीं करवा सकती और सब क्षेत्रों की समस्याएँ भी समान नहीं होतीं। इसलिए लोकतान्त्रिक राष्ट्र में तो विशेष रूप से क्षेत्रीय माँगे उठती रहती और क्षेत्रीय आंदोलन होते है। संघात्मक व्यवस्था में ये अधिक होते हैं। परन्तु एकात्मक राज्य में भी तथा तानाशाही राज्य में भी इनका उभरना चलता रहता है।
परन्तु सभी क्षेत्रीय आंदोलन आगे चलकर अलगाववादी प्रकृति अपना लेते हैं, ऐसी बात नहीं। यदि क्षेत्रीय आंदोलनों की ओर आरंभ में ही ध्यान दे दिया जाए, बात - चीत के द्वारा क्षेत्रीय आकांक्षाओं तथा माँगों की पूर्ति के प्रयास किए जाएँ तो क्षेत्रीय आंदोलन को बलपूर्वक दबाने का प्रयास करती है, आंदोलन कारियों की बात ही सुनने को तैयार नहीं होती तो वह आंदोलन दबने की बजाए ज़्यादा तेज़ हो जाता हैं, हिंसात्मक हो जाता है, आंदोलन को कुचलने का प्रयास उसे अपनी माँगों की वृद्धि करने पर मजबूर करता है और क्षेत्र के लोगों का समर्थन अधिक मात्रा में प्राप्त होने लगता है तथा क्षेत्र के लोग अपने को राष्ट्र की मुख्य धारा से अलग करके अपना अलग राष्ट्र राज्य बनाने के प्रयास आरंभ कर देते हैं। भारत में स्वतंत्रता के बाद उपजे विभिन्न क्षेत्रीय आंदोलन इस तथ्य की पुष्टि करता हैं। उत्तर - पूर्वी के राज्यों में उभरे सभी क्षेत्रीय आंदोलन अलगाववादी प्रकृति के नहीं हुए। असम का क्षेत्रीय आंदोलन अलगाववादी नहीं हुआ।
आज पंजाब में अलगाववादी माँग नहीं है। जम्मू - कश्मीर में सभी समूह अलगाववादी नहीं है। वहाँ कई समूहों को पाकिस्तान द्वारा अलगाववादी निति अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। दक्षिण भारत के क्षेत्रीय आंदोलन अलगाववाद नहीं हुआ। अधिकतर क्षेत्रीय आंदोलन क्षेत्रीय स्वायत्तता, नदी जल बँटवारे, किसी क्षेत्र को किसी दूसरे राज्य के साथ मिलाने, क्षेत्रीय विकास की माँग, क्षेत्रीय भाषा तथा संस्कृति के प्रश्न आदि के आधार पर खड़े होते हैं और सभी क्षेत्रीय आंदोलन अलगाववादी नहीं होते। क्षेत्रीय आंदोलन आपसी बातचीत तथा शीघ्रता से किया गया हल उसे हिंसात्मक तथा उग्रवादी नहीं होने देता।