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प्रश्न
अष्टक नियम को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
अष्टक नियम (Octet Rule) - वर्ग 18 में उपस्थित अक्रिय गैसों अथवा उत्कृष्ट गैस तत्त्वों को शून्य वर्ग के तत्त्व भी कहा जाता है। इसका अर्थ है कि इनकी संयोजकता शून्य है अर्थात् इनके परमाणु स्वतंत्र अवस्था में पाए जा सकते हैं। उत्कृष्ट गैस तत्त्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास निम्नांकित सारणी में दिए गए हैं-
सारणी-1: उत्कृष्ट गैसों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
तत्त्व | प्रतीक | परमाणु क्रमांक | इलेक्ट्रॉनिक विन्यास |
हीलियम | He | 2 | `underline(1"s"^2)` |
निऑन | Ne | 10 | `1"s"^2, underline(2"s"^2 2"p"^6)` |
आर्गन | Ar | 18 | `1"s"^2, 2"s"^2 2"p"^6, underline(3"s"^2 3"p"^6)` |
क्रिप्टॉन | Kr | 36 | `1"s"^2, 2"s"^2 2"p"^6, 3"s"^2 3"p"^6 3"d"^10, underline(4"s"^2 4"p"^6)` |
जीनॉन | Xe | 54 | `1"s"^2, 2"s"^2 2"p"^6, 3"s"^2 3"p"^6 3"d"^10, 4"s"^2 4"p"^6 4"d"^10, underline(5"s"^2 5"p"^6)` |
रेडॉन | Rn | 86 | `1"s"^2, 2"s"^2 2"p"^6, 3"s"^2 3"p"^6 3"d"^10, 4"s"^2 4"p"^6 4"d"^10 4"f"^14, 5"s"^2 5"p"^6 5"d"^10, underline(6"s"^2 6"p"^6)` |
प्रथम सदस्य हीलियम, जिसके संयोजी कोश में केवल दो इलेक्ट्रॉन हैं, के अतिरिक्त शेष सदस्यों के संयोजी कोश में आठ इलेक्ट्रॉन हैं। सन् 1916 में जीएन लूइस तथा कॉसेल ने ज्ञात किया कि उत्कृष्ट गैस तत्वों का स्थायित्व इनके संयोजी कोशों में आठ इलेक्ट्रॉनों (हीलियम को छोड़कर) अथवा पूर्ण अष्टक की उपस्थिति के कारण होता है। इनके अनुसार अन्य तत्त्वों के परमाणुओं के बाह्य कोश में आठ से कम इलेक्ट्रॉन होते हैं; अतः ये तत्त्व अपना आदर्श स्थायी रूप प्राप्त करने के प्रयत्न में रासायनिक संयोजनों में भाग लेते हैं जिससे वे इलेक्ट्रॉनों के आदान-प्रदान द्वारा अपने समीपवर्ती अक्रिय गैस के समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ग्रहण कर सकें। इसे अष्टक नियम कहते हैं। वास्तव में इलेक्ट्रॉनों द्वारा रासायनिक आबंधों के बनने की व्याख्या के लिए कई प्रयास किए गए, परंतु कॉसेल तथा लुइस स्वतंत्र रूप से संतोषजनक व्याख्या देने में सफल हुए। उन्होंने सर्वप्रथम संयोजकता की तर्क-संगत व्याख्या की। यह व्याख्या उपर्युक्त दी गई उत्कृष्ट गैसों की अक्रियता पर आधारित थी।
लूइस परमाणुओं को एक धन-आवेशित अष्टि (नाभिक तथा आतंरिक इलेक्ट्रॉन युक्त) तथा बाह्य कक्षकों के रूप में निरूपित किया गया। बाह्य कक्षकों में अधिकतम आठ इलेक्ट्रॉन समाहित हो सकते हैं। उसने यह माना कि ये आठों इलेक्ट्रॉन घन के आठ कोनों पर उपस्थित हैं, जो केंद्रीय अष्टि को चारों ओर से घेरे रहते हैं। इस प्रकार सोडियम के बाह्य कोश में उपस्थित एकल इलेक्ट्रॉन घन के एक कोने पर स्थित रहता है, जबकि उत्कृष्ट गैसों में घन के आठों कोनों पर एक-एक इलेक्ट्रॉन उपस्थित रहते हैं। लूइस ने यह अभिगृहीत दिया कि परमाणु परस्पर रासायनिक आबंध द्वारा संयुक्त होकर अपने स्थायी अष्टक को प्राप्त करते हैं। उदाहरण के लिए सोडियम एवं क्लोरीन में सोडियम अपने एक इलेक्ट्रॉन को क्लोरीन को सरलतापूर्वक देकर अपना स्थायी अष्टक प्राप्त करता है तथा क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन प्राप्त कर अपना स्थायी अष्टक निर्मित करता है, अर्थात् सोडियम (Na+) तथा क्लोरीन (Cl–) आयन बनते हैं।
\[\ce{Na -> Na^+ + e^-}\]
\[\ce{Cl + e -> Cl}\]
\[\ce{Na^+ + Cl^- -> NaCl}\] या Na+ Cl–
इस प्रकार कॉसेल तथा लूइस ने परमाणुओं के बीच रासायनिक संयोजन के एक महत्त्वपूर्ण सिद्धांत को विकसित किया। इसे ‘रासायनिक आबंधन का इलेक्ट्रॉनिकी सिद्धांत’ कहा जाता है। इस सिद्धांत के अनुसार-
परमाणुओं का संयोजन संयोजक इलेक्ट्रॉनों के एक परमाणु से दूसरे परमाणु पर स्थानांतरण के द्वारा अथवा संयोजक इलेक्ट्रॉनों के सहभाजन (sharing) के द्वारा होता है।
इस प्रक्रिया में परमाणु अपने संयोजकता कोश में अष्टक प्राप्त करते हैं।
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