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प्रश्न
भारत के शुरुआती चाय या कॉफी बाग़ानों का इतिहास देखें। ध्यान दें कि इन बाग़ानों में काम करने वाले मजदूरों और नील के बाग़ानों में काम करने वाले मजदूरों के जीवन में क्या समानताएँ या फर्क थे।
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
चाय या कॉफी बाग़ानों तथा नील बाग़ानों के मजदूरों के जीवन में समानताएँ ब अंतर-
- चाय बागानों में मजदूरों को अनुबंधों के आधार पर रखा जाता था जबकि नील बागानों में ऐसा नहीं था।
- चाय या कॉफी बागानों में पूरे वर्ष काम होता था जबकि नील बाग़ानों में फसल कटाई या बुवाई के समय अधिक काम होता था।
- चाय या कॉफी बागानों से मज़दूर अनुबंध की अवधि के दौरान बागानों से बाहर नहीं जा सकते थे जबकि नील बाग़ानों में ऐसा नहीं होता था।
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यूरोप के लिए फ़सलें
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निम्नलिखित के जोड़े बनाएँ-
रैयत | ग्राम - समूह |
महाल | किसान |
निज | रैयतों की जमीन पर खेती |
रैयती | बागान मालिकों की अपनी जमीन पर खेती |
यूरोप में वोड उत्पादकों को ______ से अपनी आमदनी में गिरावट का ख़तरा दिखाई देता था।
अठारहवीं सदी के आखिर में ब्रिटेन में नील की माँग ______ के कारण बढ़ने लगी।
______ की खोज से नील की अंतर्राष्ट्रीय माँग पर बुरा असर पड़ा।
रैयत नील की खेती से क्यों कतरा रहे थे?
किन परिस्थितियों में बंगाल में नील का उत्पादन धराशायी हो गया?