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प्रश्न
रैयत नील की खेती से क्यों कतरा रहे थे?
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
रैयतों का नील की खेती से कतराने का कारण-
- रैयतों को बागान मालिकों द्वारा समझौता करने के लिए बाध्य करना जिससे उन्हें काम ब्याज दरों पर नकद कर्ज मिल जाता था लेकिन उन्हें बागान मालिकों द्वारा कम कीमत पर नील बेचने पर मजबूर किया जाता था जिससे रैयत अपना ऋण नहीं चूका पाते थे और अगली फसल के लिए दोबारा अग्रिम ऋण मिल जाता था और ये चक्र निरंतर चलता था जिससे किसानों की दुर्दशा होने लगी।
- बागान मालिक चाहते थे की किसान अपने सबसे उपजाऊ खेतो में ही नील की खेती करें लेकिन नील के साथ एक परेशानी थी की उसकी जड़े बहुत गहरी होती थी और वहां पर नील की खेती के बाद धान की खेती नहीं की जा सकती थी।
- सबसे बड़ी समस्या थी की नील की कटाई का वक्त और धान की कटाई का वक्त एक ही होता था जिससे किसानों को नील की कटाई के लिए मजदुर उपलब्ध हो पाते थे।
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यूरोप के लिए फ़सलें
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रैयत | ग्राम - समूह |
महाल | किसान |
निज | रैयतों की जमीन पर खेती |
रैयती | बागान मालिकों की अपनी जमीन पर खेती |
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