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भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए - मानता हुआ कि हाँ मैं लाचार हूँ ........... एक मामूली धोखेबाज़ - Hindi (Elective)

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प्रश्न

भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

मानता हुआ कि हाँ मैं लाचार हूँ ........... एक मामूली धोखेबाज़

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उत्तर

भाव यह है कि भ्रष्ट लोगों को देखकर भी कवि कुछ नहीं कर पाता इसलिए वह स्वयं को लाचार मानता है। परन्तु यदि प्रयास करता तो शायद कुछ बदलाव हो सकता था। यही कारण है कि वह स्वयं को कामचोर कहने से नहीं हिचकिचाता। ईमानदार लोगों की दशा को अनदेखा करने के कारण स्वयं को धोखेबाज़ भी कह डालता है। लोगों के भ्रष्ट व्यवहार ने उसके हाथ बाँध दिए हैं। वह अपने सम्मुख एक ईमानदार व्यक्ति को हाथ फैलाते देखता है परन्तु हालात उसे विवश कर देते हैं। वह उसकी ऐसी दशा देखकर भी चुप है। यही कारण है कि वह स्वयं को इस प्रकार के नामों से पुकारता है।

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एक कम
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अध्याय 1.05: विष्णु खरे (एक कम, सत्य) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ३३]

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एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
अध्याय 1.05 विष्णु खरे (एक कम, सत्य)
प्रश्न-अभ्यास | Q 5. (ख) | पृष्ठ ३३

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