हिंदी

हाथ फैलाने वाले व्यक्ति को कवि ने ईमानदार क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए। - Hindi (Elective)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

हाथ फैलाने वाले व्यक्ति को कवि ने ईमानदार क्यों कहा है? स्पष्ट कीजिए।

टिप्पणी लिखिए

उत्तर

हाथ फैलाने वाला व्यक्ति स्वयं को भ्रष्टाचार में लिप्त नहीं करता। इस कारण उसकी ऐसी दशा हो जाती है कि उसे दूसरों के आगे हाथ फैलाने पड़ते हैं। उसका परिवार दर-दर की ठोकरें खाने को विवश हो जाता है। यदि वह अन्य लोगों की भांति भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाता, तो उसकी चाँदी हो जाती। उसके पास दुनिया की हर सुख-सुविधा विद्यमान होती। परन्तु वह स्वयं को इन सबसे दूर रखता है। वह गरीबी का जीवन तथा दूसरे के आगे हाथ फैलाना उचित समझता है लेकिन बेईमानी की एक दिन की रोटी कमाना उचित नहीं समझता। इसलिए कवि ने उसे ईमानदार कहा है। उसकी दशा उसकी ईमानदारी का प्रमाण है।

shaalaa.com
एक कम
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 1.05: विष्णु खरे (एक कम, सत्य) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ ३३]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
अध्याय 1.05 विष्णु खरे (एक कम, सत्य)
प्रश्न-अभ्यास | Q 2. | पृष्ठ ३३

संबंधित प्रश्न

कवि ने लोगों के आत्मनिर्भर, मालामाल और गतिशील होने के लिए किन तरीकों की ओर संकेत किया है? अपने शब्दों में लिखिए।


'मैं तुम्हारा विरोधी प्रतिद्वंद्वी या हिस्सेदार नहीं' से कवि का क्या अभिप्राय है?


भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
1947 के बाद से ........... गतिशील होते देखा है


भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

मानता हुआ कि हाँ मैं लाचार हूँ ........... एक मामूली धोखेबाज़


भाव सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
तुम्हारे सामने बिलकुल ............ लिया है हर होड़ से


शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
कि अब जब कोई ............. या बच्चा खड़ा है।


शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

मैं तुम्हारा विरोधी प्रतिद्वंद्वी ............... निश्चिंत रह सकते हैं।


1947 से लोग अनेक तरीके से मालामाल हुए किन्तु विमुद्रिकरण होने से उन स्थितियों में बदलाव आया या नहीं?


Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×