Advertisements
Advertisements
प्रश्न
बनारस में धीरे-धीरे क्या होता है? 'धीरे-धीरे' से कवि इस शहर के बारे में क्या कहना चाहता है?
उत्तर
कवि के अनुसार बनारस शहर में धूल धीरे-धीरे उड़ती है, यहाँ लोग धीरे-धीरे चलते हैं, धीरे-धीरे ही यहाँ मंदिरों में घंटे बजते हैं तथा शाम भी यहाँ धीरे-धीरे होती है। कवि के अनुसार यहाँ सभी कार्य धीरे-धीरे होना इस शहर की विशेषता है। यह शहर को सामूहिक लय प्रदान करता है। धीरे-धीरे शब्दों द्वारा कवि बनारस में हो रहे बदलावों को दर्शाता है। उसके अनुसार सारी दुनिया में तेज़ी से बदलाव हो रहे हैं। इन बदलावों की रफ़्तार इतनी तेज़ है कि पुराना सब खो गया है। लोग स्वयं को इन बदलावों में झोंक रहे हैं। इससे हमारी सभ्यता और संस्कृति को नुकसान पहुँचता है। परन्तु बनारस इन बदलावों से अभी तक अछूता है। वहाँ बदलाव हो अवश्य रहे हैं परन्तु उनकी रफ़्तार बहुत कम है। इस प्रकार आज भी बनारस की संस्कृति, विरासत तथा धार्मिक मान्यताएँ वैसी की वैसी ही बनी हुई हैं। वह अपने पुराने स्वरूप को बनाए हुए है। तेज़ी के इस दौर में वह भूत तथा वर्तमान से बंधे हुए दृढ़तापूर्वक चल रहा है।
APPEARS IN
संबंधित प्रश्न
बनारस में वसंत का आगमन कैसे होता है और उसका क्या प्रभाव इस शहर पर पड़ता है?
'खाली कटोरों में वसंत का उतरना' से क्या आशय है?
बनारस की पूर्णता और रिक्तता को कवि ने किस प्रकार दिखाया है?
धीरे-धीरे होने की सामूहिक लय में क्या-क्या बँधा है?
'सई साँझ' में घुसने पर बनारस की किन-किन विशेषताओं का पता चलता है?
बनारस शहर के लिए जो मानवीय क्रियाएँ इस कविता में आई हैं, उनका व्यंजनार्थ स्पष्ट कीजिए।
शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
'यह धीरे-धीरे होना ............ समूचे शहर को'
शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
'अगर ध्यान से देखो ............. और आधा नहीं है'
शिल्प-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
'अपनी एक टाँग पर ............. बेखबर'
आप बनारस के बारे में क्या जानते हैं? लिखिए।
बनारस के चित्र इकट्ठे कीजिए।
बनारस शहर की विशेषताएँ जानिए।
निम्नलिखित काव्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर उस पर आधारित दिए गए प्रश्नों के सर्वाधिक उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए -
जो है वह खड़ा है किसी अलक्षित सूर्य को |
(क) जो है वह खडा है बिना किसी स्तंभ के.......' वह जो बिना सहारे के खड़ी है - (1)
- दार्शनिकता
- आध्यात्मिकता
- धुएं की विशालता
- पानी की पवित्रता
(ख) 'अपनी दूसरी टांग से बिल्कुल बेखबर' पंक्ति का आशय है कि - (1)
- अध्यात्मिकता से अनभिज्ञ होना
- आधुनिकता से अनभिज्ञ होना
- सांसारिकता से अनभिज्ञ होना
- दार्शनिकता से अनभिज्ञ होना
(ग) राख के स्तंभ से क्या अभिप्राय है? (1)
- पूजा-पाठ की सामग्री के ढेर से
- शवों के राख के ढेर से
- मिट्टी के ढेर से
- मुरझाए फूलों के ढेर से
(घ) आस्था, विरक्ति, विश्वास, आश्चर्य और भक्ति का मिला-जुला रूप दिखाई देता है - (1)
- श्रद्धा और अंधभक्ति में
- मोक्ष की अवधारणा में
- मिथकीय आस्था में
- बनारस की आध्यात्मिकता में
(ङ) मनुष्य के हाथ स्तंभ की भांति खड़े हो जाते हैं - (1)
- मंदिर की ध्वजा को प्रमाण करने के लिए
- अदृश्य को अर्घ्य देने के लिए
- किसी की मदद के लिए
- श्रेष्ठता सिद्ध करने के लिए