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प्रश्न
चयनात्मक अवधान के निर्धारकों का वर्णन कीजिए। चयनात्मक अवधान संधृत अवधान से किस प्रकार भिन्न होता है?
उत्तर
चयनात्मक अवधान का संबंध मुख्यतः अनेक उद्दीपकों में से कुछ सीमित उद्दीपकों अथवा वस्तुओं के चयन से होता है। हमारे प्रात्यक्षिक तंत्र में सूचनाओं को प्राप्त करने एवं उनका प्रक्रमण करने की सीमित क्षमता होती है। इसका अर्थ यह है कि एक विशेष समय में वे केवल कुछ उद्दीपकों पर ही ध्यान दे सकते हैं। प्रश्न यह है कि इनमें से किन उद्दीपकों का चयन और प्रक्रमण होगा। मनोवैज्ञानिकों ने उद्दीपकों के चयन को निर्धारित करने वाले अनेक कारकों का पता लगाया है।
चयनात्मक अवधान को प्रभावित करने वाले कारक :
चयनात्मक अवधान को अनेक कारक प्रभावित करते हैं। ये सामान्यतया उद्दीपकों की विशेषताओं तथा व्यक्तियों की विशेषताओं से जुड़े होते हैं। इन्हें सामान्यतया 'बाह्य' एवं 'आंतरिक' कारकों में वर्गीकृत किया जाता है।
- बाहा कारक (External factors) :
ये कारक उद्दीपकों के लक्षणों से संबंधित होते हैं। अन्य चीजों के स्थिर होने पर उद्दीपकों के आकार, तीव्रता तथा गति अवधान के प्रमुख निर्धारक होते हैं। बड़ा, दयुतिमान तथा गतिशील उद्दीपक हमारे अवधान में शीघ्रता से आ जाता है। जो उद्दीपक नवीन होते हैं तथा सामान्य रूप से जटिल होते हैं वे भी सरलतापूर्वक हमारे अवधान में आ जाते हैं। अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि मनुष्य के फोटोचित्र अन्य निर्जीव वस्तुओं के फोटोचित्रों की तुलना में हमारे ध्यान में शीघ्रता से आजाते हैं। इसी प्रकार, शाब्दिक कथनों की तुलना में लयबद्ध श्रवण उद्दीपक शीघ्रता से उद्दीप्त होते हैं। अवधान के लिए आकस्मिक एवं तीव्र उद्दीपकों में ध्यानाकर्षण की अदृभुत क्षमता होती है। - आंतरिक कारक (Internal factors) -
ये कारक व्यक्ति के अंदर पाए जाते हैं। इन्हें दो मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है; अभिप्रेरणात्मक कारक तथा संज्ञानात्मक कारक।- अभिप्रेरणात्मक कारकों (Motivational factors) - अभिप्रेरणात्मक कारका संबंध हमारी जैविक एवं सामाजिक आवश्यकताओं से होता है। जब हम भूखे होते हैं तो भोजन की हल्की गंध को भी हम सूंघ लेते हैं। जिस विद्यार्थी को परीक्षा देनी होती है, वह परीक्षा न देने वाले विद्यार्थी की तुलना में शिक्षक के भाषण पर अधिक ध्यान केंद्रित करता है।
- संज्ञानात्मक कारकों (Cognitive factors) -
संज्ञानात्मक कारक अंतर्गत अभिरुचि, अभिवृत्ति तथा पूर्वविन्यास आदि कारक आते हैं। वस्तुएं अथवा घटनाएँ, जो रुचिकर होती हैं, व्यक्तियों के ध्यान में शीघ्रतापूर्वक आती हैं। इसी प्रकार, जिन वस्तुओं अथवा घटनाओं के प्रति हम अनुकूल दृष्टि से रुचि लेते हैं, उन पर शीघ्रतापूर्वक ध्यान देते हैं। पूर्वविन्यास एक मानसिक स्थिति उत्पन्न करता है जो एक निश्चित दिशा में कार्य करने को प्रेरित करती है। यह तत्परता भी उत्पन्न करती है जिससे व्यक्ति एक विशेष उद्दीपक के पति अनुक्रिया करने को उन्मुख होता है, अन्य के प्रति नहीं।
संधृत अवधान : जहाँ चयनात्मक अवधान मुख्यतः उद्दीपकों के चयन से सम्बंधित होता है, वहीं संधृत अवधान का संबंध एकाग्रता से होता है। यह हमारी उस योग्यता से जुड़ा होता है जिससे हम अपना ध्यान किसी वस्तु अथवा घटना पर देर तक बनाए रखते हैं। इसे सतर्कता भी कहते हैं।