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प्रश्न
अवधान को परिभाषित कीजिए।
उत्तर
अवधान या ध्यान शब्द से प्रत्येक व्यक्ति परिचित है। सामान्य बोलचाल की भाषा में भी इस शब्द का पर्याप्त प्रयोग होता है। अमुक्त व्यक्ति बहुत ही ध्यान से अपना कार्य करता है। पाठ याद करने के लिए ध्यान लगाना आवश्यक है। बिना ध्यान लगाए किया गया कार्य बिगड़ जाता है। इन सब वाक्यो से स्पष्ट होता है कि ध्यान कोई शक्ति है, जिसे केंद्रित किया जाता है। मनोविज्ञान में अवधान या ध्यान का व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक अध्ययन किया जाता है। अवधान का आधार रुचि है। जिन वस्तुओं में हमारी रुचि होती है, हमारा ध्यान उस ओर अधिक केंद्रित होता है। ग्रीस ने इस तथ्य को विभिन्न प्रयोगों द्वारा सिद्ध किया है। अतः ध्यान समी वस्तुओं पर न जाकर कुछ वस्तुओं अथवा विषयों पर ही केन्द्रित होता है। यह एक चयनात्मक क्रिया है।
अवधान अथवा ध्यान का अर्थ एवं परिभाषा :
विभिन्न मानसिक शक्तियों को किसी अभीष्ट कार्य पर केन्द्रित करना अवधान कहलाता है। मानसिक शक्तियों को इस प्रकार केन्द्रित करना एक मानसिक प्रक्रिया है। सामान्य रूप से हर समय वातावरण में विद्यमान अनेक उत्तेजनाएँ व्यक्ति की ज्ञानेन्दरियों को प्रभावित करती रहती हैं, पा व्यक्ति न तो सब उत्तेजनाओं को ग्रहण करता है और न ही उनके प्रति अपनी प्रतिक्रिया प्रकट करता है। व्यक्ति किस उत्तेजना को ग्रहण करेगा, यह विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है। जिस उत्तेजना को वह ग्रहण करना चाहता है. उसी उत्तेजना पर उसे ध्यान केन्द्रित करना होगा। इस प्रकार कहा जा सकता है कि अवधान या ध्यान एक चयनात्मक क्रिया भी है। संक्षेप में कहा जा सकता है कि किसी उत्तेजना के प्रति व्यक्ति की चेतना अथवा मानसिक शक्तियों के केन्द्रीयकरण की प्रक्रिया ही ध्यान या अवधान है।
अवधान की विभिन विद्वानों द्वारा प्रतिपादित परिभाषाएँ निम्नलिखित हैं -
- एन. एल. मन :
आधुनिक मनोवैज्ञानिक मन ने अवधान को इन शब्दों में स्पष्ट किया है. "ध्यान को हम चाहे जिस दृष्टिकोण से विचार करें, विश्लेषण के अंत में यह एक प्रेरणात्मक प्रक्रिया ही है।" - जे. एस. रॉस :
जे. एस. रॉस ने भी अवधान को एक प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया है। उनके अनुसार, "किसी विचार की वस्तु को मन के सामने स्पष्ट रूप से रखने की प्रक्रिया अवधान है।" - मैक्डूगल :
प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक मैक्ड्रगल ने अवधान की परिभाषा इन शब्दों में प्रस्तुत की है- "अवधान ज्ञानात्मक प्रक्रिया पर पड़े प्रभाव के दृष्टिकोण से विचार किए जाने पर मात्र एक चेष्टा याक्रिया है।" - डम्बिल :
डम्बिल ने अवधान का अर्थ इन शब्दों में स्पष्ट किया है, "यह किन्हीं अन्य वस्तुओं की अपेक्षा किसी एक वस्तु पर चेतना का केन्द्रीकरण है।"
संक्षेप में कहा जा सकता है कि अवधान एक ऐसी मानिसक प्रक्रिया है, जिसमें विभिन्न मानसिक शक्तियों को अभीष्ट विषय-वस्तु पर केन्द्रित किया जाता है तथा इस स्थिति में अन्य विषय-वस्तुओं की अवहेलना की जाती है। ध्यान अथवा अवधान की पूर्ण व्याख्या के लिए इसकी विशेषताओं का उल्लेख करना भी अनिवार्य है।