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प्रश्न
'डायरी का पन्ना' पाठ से उद्धृत -'यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।' -पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर
उस समय देश की आजादी के लिए हर कोई अपना सर्वस्व न्यौछावर करने को तैयार था। अंग्रेजों ने विरोध प्रदर्शनों और जुलूसों पर प्रतिबंध लगाने के लिए सख्त कानून बनाए थे, लेकिन लोगों पर इन नियमों का कोई असर नहीं हुआ। वे ब्रिटिश शासन से मुक्त होने के लिए दृढ़ संकल्पित होकर स्वतंत्रता के लिए विरोध करते रहे। इन विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए पुलिस ने घोषणा की कि किसी भी जुलूस या सभा की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके बावजूद, सुभाष बाबू के नेतृत्व में परिषद ने घोषणा की कि स्मारक पर झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की शपथ पढ़ी जाएगी। उन्होंने सभी को आमंत्रित किया और संदेश को व्यापक रूप से फैलाया। पूरे कलकत्ता में झंडे फहराए गए। यह खुली झड़प सरकार और जनता के बीच यही कारण है कि इसे खुली लड़ाई कहा जाता है।