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'झेन की देन' पाठ में लेखक ने भूत और भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। इस विषय पर आपके क्या विचार हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए। - Hindi Course - B

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प्रश्न

'झेन की देन' पाठ में लेखक ने भूत और भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी है। इस विषय पर आपके क्या विचार हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

'झेन की देन' पाठ में लेखक द्वारा दी गई भूत और भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह अत्यंत प्रासंगिक और मूल्यवान है। वर्तमान में जीना एक ऐसा सिद्धांत है, जो न केवल मानसिक शांति प्रदान करता है, बल्कि जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाता है। हमारा दिमाग अकसर या तो गुजूरे हुए दिनों की खट्टी-मीठी यादों में उलझा रहता है या भविष्य के रंगीन सपने देखता रहता है। हम या तो भूतकाल में रहते हैं या भविष्यकाल में। यह स्पष्ट करता है कि हमारे व्यक्तित्व में स्थिरता का अभाव है। भूतकाल में जीकर कोई लाभ नहीं क्योंकि जो बीत चुका है उसे बदला नहीं जा सकता और भविष्य को सँवारने के लिए वर्तमान का सदुपयोग अत्यन्त आवश्यक है। अत: वर्तमान में जीकर भविष्य को सँवारना चाहिए।

वर्तमान में जीना हमें आत्म-जागरूकता, शांति और संतुलन प्रदान करता है। जब हम वर्तमान में होते हैं, तब हम अपने आसपास की चीजों को गहराई से अनुभव कर पाते हैं, अपने रिश्तों में सच्ची भागीदारी कर पाते हैं और अपने कार्यों में सर्वोत्तम प्रदर्शन कर सकते हैं।

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