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धनराम को मोहन के किस व्यवहार पर आश्चर्य होता है और क्यों? - Hindi (Core)

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प्रश्न

धनराम को मोहन के किस व्यवहार पर आश्चर्य होता है और क्यों?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

मोहन ब्राहमण जाति का था और उस गाँव में ब्राहमण शिल्पकारों के यहाँ उठते-बैठते नहीं थे। यहाँ तक कि उन्हें बैठने के लिए कहना भी उनकी मर्यादा के विरुद्ध समझा जाता था। मोहन धनराम की दुकान पर काम खत्म होने के बाद भी काफी देर तक बैठा रहा। इस बात पर धनराम को हैरानी हुई। उसे अधिक हैरानी तब हुई जब मोहन ने उसके हाथ से हथौड़ा लेकर लोहे पर नपी-तुली चोटें मारी और धौंकनी फूंकते हुए भट्ठी में लोहे को गरम किया और ठोक-पीटकर उसे गोल रूप दे दिया। मोहन पुरोहित खानदान का पुत्र होने के बाद निम्न जाति के काम कर रहा था। धनराम शकित दृष्टि से इधर-उधर देखने लगा।

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गलता लोहा
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अध्याय 1.05: गलता लोहा - अभ्यास [पृष्ठ ६५]

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एनसीईआरटी Hindi - Aaroh Class 11
अध्याय 1.05 गलता लोहा
अभ्यास | Q 3. | पृष्ठ ६५

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