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उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी- कहानी का यह वाक्य- (क) किसके लिए कहा गया है? (ख) किस प्रसंग में कहा गया है? (ग) यह पात्र-विशेष के किन चारित्रिक पहलुओं को उजागर करता है? - Hindi (Core)

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प्रश्न

उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी- कहानी का यह वाक्य-

(क) किसके लिए कहा गया है?

(ख) किस प्रसंग में कहा गया है?

(ग) यह पात्र-विशेष के किन चारित्रिक पहलुओं को उजागर करता है?

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

(क) यह वाक्य मोहन के लिए कहा गया है।

(ख) जिस समय मोहन धनराम के आफ़र पर आकर बैठता है और अपना हँसुवा ठीक हो जाने पर भी बैठा रहता है, उस समय धनराम एक लोहे की छड़ को गर्म करके उसका गोल घेरा बनाने का प्रयास कर रहा है, पर निहाई पर ठीक घाट में सिरा न फँसने के कारण लोहा उचित ढंग से मुड़ नहीं पा रहा था। यह देखकर मोहन उठा और हथौड़े से नपी-तुली चोट मारकर उसे सुघड़ गोले का रूप दे दिया। अपने सधे हुए अभ्यस्त हाथों का कमाल दिखाकर उसने सर्जक की चमकती आँखों से धनराम की ओर देखा था।

(ग) यह कार्य कहानी का प्रमुख पात्र मोहन करता है जो एक ब्राह्मण का पुत्र है। वह अपने बालसखा धनराम को अपनी सुघड़ता का परिचय देता है। अपनी कुशलता दिखाता है। मोहन का व्यक्तित्व जातिगत आधार पर निर्मित नहीं वरन् मेहनतकश और सच्चे भाई-चारे की प्रस्तावना करता प्रतीत होता है। मानो मेहनत करनेवालों का संप्रदाय जाति से ऊपर उठकर मोहन के व्यक्तित्व के रूप में समाज का मार्गदर्शन कर रहा हो।

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गलता लोहा
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अध्याय 1.05: गलता लोहा - अभ्यास [पृष्ठ ६५]

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एनसीईआरटी Hindi - Aaroh Class 11
अध्याय 1.05 गलता लोहा
अभ्यास | Q 6. (2) | पृष्ठ ६५

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