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'दूसरा देवदास' कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए। - Hindi (Elective)

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प्रश्न

'दूसरा देवदास' कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।
दीर्घउत्तर

उत्तर

इस कहानी का नाम 'दूसरा देवदास' बिलकुल उचित है। यह शीर्षक कहानी की सार्थकता को स्पष्ट करता है। जिस प्रकार शरतचंद्र का देवदास अपनी पारो के लिए सारा जीवन मारा-मारा फिरता रहा, वैसे ही संभव रूपी देवदास अपनी पारो के लिए मारा-मारा फिरता है। पारो की एक झलक उसे दीवाना बना देती है। वह उसे ढूँढने के लिए बाज़ार, घाट, यहाँ तक कि मनसा देवी के मंदिर तक हो आता है। उससे एक मुलाकात हो जाए इसके लिए मन्नत तक माँगता है। जब वह मिलती है, तो लड़की का पारो नाम सुनकर जैसे उसकी खोज सार्थक बन जाती है इसलिए वह अपने नाम के बाद देवदास लगाकर इसका संकेत भी दे देता है। दोनों के मध्य छोटी-सी मुलाकात प्रेम के बीज अंकुरित कर देती है। यह मुलाकात उनके अंदर प्रेम के प्रति ललक तथा रूमानियत को दर्शा देती है। देवदास वह नाम है, जो प्यार में पागल प्रेमी के लिए प्रयुक्त किया जाता है। अतः दूसरा देवदास शीर्षक संभव की स्थिति को भली प्रकार से स्पष्ट कर देता है। यही कारण है कि यह शीर्षक कहानी को सार्थकता देता है ।

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दूसरा देवदास
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अध्याय 2.09: ममता कालिया (दूसरा देवदास) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १५९]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
अध्याय 2.09 ममता कालिया (दूसरा देवदास)
प्रश्न-अभ्यास | Q 9. | पृष्ठ १५९

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