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'हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा-आशय स्पष्ट कीजिए।' - Hindi (Elective)

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प्रश्न

'हे ईश्वर! उसने कब सोचा था कि मनोकामना का मौन उद्गार इतनी शीघ्र शुभ परिणाम दिखाएगा-आशय स्पष्ट कीजिए।'
टिप्पणी लिखिए

उत्तर

पारो को अपने सामने देखकर उसके मन में यह वाक्य उत्पन्न हुआ। जिस लड़की को पाने के लिए उसने कुछ देर पहले ही मनसा देवी में धागा बाँधा था, वह देवी के मंदिर के बाहर ही मिल गई। वह पारो को देखकर प्रसन्न हो उठा। आज उसकी मनोकामना इतना शुभ परिणाम लेकर सामने आई थी।
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दूसरा देवदास
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अध्याय 2.09: ममता कालिया (दूसरा देवदास) - प्रश्न-अभ्यास [पृष्ठ १५९]

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एनसीईआरटी Hindi - Antara Class 12
अध्याय 2.09 ममता कालिया (दूसरा देवदास)
प्रश्न-अभ्यास | Q 10. | पृष्ठ १५९

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