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महाराष्ट्र स्टेट बोर्डएसएससी (हिंदी माध्यम) १० वीं कक्षा

दूसरे पद का सरल अर्थ लिखिए | प्रीति करि काहू सुख न लह्यौ।प्रीति पतंग करी पावक सौं, आपै प्रान दह्यौ।। अलिसुत प्रीति करी जलसुत सौं, संपुट मांझ गह्यौ।सारंग प्रीति करी जु नाद सौं, सन्मुख बान सह्य - Hindi [हिंदी]

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प्रश्न

दूसरे पद का सरल अर्थ लिखिए |

प्रीति करि काहू सुख न लह्यौ।
प्रीति पतंग करी पावक सौं, आपै प्रान दह्यौ।।
अलिसुत प्रीति करी जलसुत सौं, संपुट मांझ गह्यौ।
सारंग प्रीति करी जु नाद सौं, सन्मुख बान सह्यौ।।
हम जो प्रीति करी माधव सों, चलत न कछू कह्यौ।
सूरदास प्रभु बिनु दुख पावत, नैननि नीर बह्यौ।।

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उत्तर

कृष्ण के वियोग से दुखी होकर एक गोपी कहती है कि प्रेम का अंत दुखद होता है | गोपी कहती है कि पतंगा आग से प्रेम करता है तो अंततः वह आग में जल कर अपना जीवन समाप्त कर देता है | भौंरा कमल से प्रेम करता है, परिणाम स्वरूप वह पुष्पकोष में बंद हो जाता है | हिरण नाद से प्रेम करता है | नाद सुनकर वह अपने स्थान पर खड़ा जाता है और बहेलिए के बाण का शिकार बन जाता है | हमने (गोपियों ने) कृष्ण से प्रेम किया, तो उन्होंने गोकुल से जाते समय हमें बताया तक नहीं | यदि वे हम लोगों से कुछ कहकर जाते, तो हमें इतना दुख नहीं होता |

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ब्रजवासी
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अध्याय 1.09: ब्रजवासी - स्‍वाध्याय [पृष्ठ ४४]

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बालभारती Hindi - Kumarbharati 10 Standard SSC Maharashtra State Board
अध्याय 1.09 ब्रजवासी
स्‍वाध्याय | Q (५) | पृष्ठ ४४
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