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Question
दूसरे पद का सरल अर्थ लिखिए |
प्रीति करि काहू सुख न लह्यौ।
प्रीति पतंग करी पावक सौं, आपै प्रान दह्यौ।।
अलिसुत प्रीति करी जलसुत सौं, संपुट मांझ गह्यौ।
सारंग प्रीति करी जु नाद सौं, सन्मुख बान सह्यौ।।
हम जो प्रीति करी माधव सों, चलत न कछू कह्यौ।
सूरदास प्रभु बिनु दुख पावत, नैननि नीर बह्यौ।।
Solution
कृष्ण के वियोग से दुखी होकर एक गोपी कहती है कि प्रेम का अंत दुखद होता है | गोपी कहती है कि पतंगा आग से प्रेम करता है तो अंततः वह आग में जल कर अपना जीवन समाप्त कर देता है | भौंरा कमल से प्रेम करता है, परिणाम स्वरूप वह पुष्पकोष में बंद हो जाता है | हिरण नाद से प्रेम करता है | नाद सुनकर वह अपने स्थान पर खड़ा जाता है और बहेलिए के बाण का शिकार बन जाता है | हमने (गोपियों ने) कृष्ण से प्रेम किया, तो उन्होंने गोकुल से जाते समय हमें बताया तक नहीं | यदि वे हम लोगों से कुछ कहकर जाते, तो हमें इतना दुख नहीं होता |
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- रचना की विधा - [1]
- पसंदीदा पंक्ति - [1]
- पसंद होने के कारण - [1]
- कविता प्राप्त प्रेरणा/संदेश - [2]