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FeSO4 विलयन तथा (NH4)2SO4 विलयन का 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रण Fe2+ आयन का परीक्षण देता है, परंतु CuSO4 व जलीय अमोनिया का 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रण Cu2+ आयनों का परीक्षण नहीं देता। समझाइए - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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प्रश्न

FeSO4 विलयन तथा (NH4)2SO4 विलयन का 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रण Fe2+ आयन का परीक्षण देता है, परंतु CuSO4 व जलीय अमोनिया का 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रण Cu2+ आयनों का परीक्षण नहीं देता। समझाइए क्यों?

रासायनिक समीकरण/संरचनाएँ
स्पष्ट कीजिए

उत्तर

FeSO4 विलयन को (NH4)2SO4 विलयन में 1 : 1 मोलर अनुपात में मिश्रित करने पर एक द्विक-लवण प्राप्त होता है, जिसे मोहर लवण (FeSO4.(NH4)2SO4.6H2O) कहते हैं।

यह निम्न प्रकार आयनित होता है –

\[\ce{FeSO4.(NH4)2SO4.6H4O -> F^{2+} + 2NH^+_4 + 3SO^{2-}_4 + 6H2O}\]

विलयन में Fe2+ आयनों की उपस्थिति के कारण यह Fe2+ आयन का परीक्षण देता है। जब CuSO4 विलयन को जलीय अमोनिया में 1 : 4 मोलर अनुपात में मिश्रित किया जाता है, तो संकर लवण [Cu(NH4)4]SO4 प्राप्त होता है। यह विलयन में निम्न प्रकार आयनित होता है –

\[\ce{[Cu(NH3)4]SO4 -> [Cu(NH3)4]^{2+} + SO^{2-}_4}\]

संकर आयन [Cu(NH3)4]2+ पुन: आयनित होकर Cu2+ आयन नहीं देता है। इसलिए विलयन Cu2+ आयन का परीक्षण नहीं देता है।

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उपसहसंयोजन यौगिकों का वर्नर का सिद्धांत
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अध्याय 9: उपसहसंयोजन यौगिक - अभ्यास [पृष्ठ २७५]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Chemistry [Hindi] Class 12
अध्याय 9 उपसहसंयोजन यौगिक
अभ्यास | Q 9.2 | पृष्ठ २७५
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