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प्रश्न
गद्यांशं पठित्वा सरलार्थं लिखत।
कर्णः | तेन हि जित्वा पृथिवीं ददामि। |
शक्रः | पृथिव्या किं करिष्यामि। नेच्छामि कर्ण, नेच्छमि। |
कर्णः | अथवा मच्छिरो ददामि। |
शक्रः | अविहा। अविहा। |
कर्णः | न भेतव्यम् न भेतव्यम्। अन्यदपि श्रूयताम्। अङ्गै: सहैव जनितं कवचं कुण्डलाभ्यां सह ददामि। |
शक्रः | (सहर्षम्) ददातु, ददातु। |
भाषांतर
उत्तर १
English:
Karna: | Then, I conquer the earth and shall not want it. |
Indra: | What shall I do with the earth? O Karna, I don’t want it; I don’t want it. |
Karna: | Otherwise, I offer my head itself. |
Indra: | May god forbid! Let it not happen so! |
Karna: | Do not be scared. Be not worried. Listen further. I offer these congenitally. |
Indra: | (With rapture) Do give! Do give! |
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उत्तर २
मराठी:
कर्ण | तर मग पृथ्वी जिकून ती देतो. |
इंद्र | पृथ्वीचे मी काय करणार? नको, कर्णा, नको. |
कर्ण | नाहीतर माझे मस्तकच देतो. |
इंद्र | देव करो आणि तसे न होवो ! |
कर्ण | घाबरू नका, भिऊ नका. आणखी ऐका. माझ्या अवयवांबरोबरच निर्माण झालेली ही कवचकुंडले देतो. |
इंद्र | (आनंदाने) द्या ! द्या !! |
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उत्तर ३
हिन्दी:
कर्ण | फिर वह धरती दान कर देता है। |
इंद्र | मैं पृथ्वी का क्या करूंगा? नहीं, कर्ण, नहीं। |
कर्ण | तो फिर मैं अपना सिर दान करता हूँ। |
इंद्र | भगवान न करे कि ऐसा घटित हो! |
कर्ण | डरो मत, डरो मत. अधिक सुनो. मैं तुम्हें यह खोल देता हूँ जो मेरे अंगों के साथ बनाया गया था। |
इंद्र | (प्रसन्न होकर) दे दो!, दे दो!! |
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संस्कृतनाट्ययुग्मम्।
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