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प्रश्न
हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।
पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ।
नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।
मगर बूंद भर तेल साँझ तक भी क्या तुम पाओगे?
उत्तर
मगर शाम तक तुम एक बूंद तेल भी नहीं पा सकोगे।
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‘पढ़क्कू की सूझ’ कविता में एक कहानी कही गई है। इस कहानी को तुम अपने शब्दों में लिखो।
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कोल्हू का बैल ऐसे व्यक्ति को कहते हैं जो कड़ी मेहनत करता है या जिससे कड़ी मेहनत करवाई जाती है।
मेहनत और कोशिश से जुड़ा कुछ और मुहावरा नीचे लिखा हैं। इसका वाक्य में इस्तेमाल करो।
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पढ़क्कू का नाम पढ़क्कू क्यों पड़ा होगा?
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हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।
पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ।
नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।
बैल हमारा नहीं अभी तक मंतिख पढ़ पाया है।
हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।
पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ।
नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।
सिखा बैल को रखा इसने निश्चय कोई ढब है।
हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।
पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ।
नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।
जहाँ न कोई बात, वहाँ भी नई बात गढ़ते थे।
नीचे दिए गए शब्दों के अर्थ अक्षरजाल में खोजो-
ढब, भेद, गजब, मंतिख, छल |
त | र्क | शा | स्त्र | म्र |
रा | ज | त | क | ब |
जू | स | री | मा | धो |
रा | ज़ | का | ल | खा |
धो | क | म | ल | ड़ |