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‘पढ़क्कू की सूझ’ कविता में एक कहानी कही गई है। इस कहानी को तुम अपने शब्दों में लिखो। - Hindi (हिंदी)

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प्रश्न

‘पढ़क्कू की सूझ’ कविता में एक कहानी कही गई है। इस कहानी को तुम अपने शब्दों में लिखो।

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

एक दिन पढ़क्कू समझ नहीं पाया कि कोल्हू का बैल बिना चलाए कैसे घूमता है। उनको लगा मालिक ने बैलों को कोई तरीका सिखा रखा है। एक दिन उसने मालिक से पूछा, “तुम कैसे जान लेते हो कि तुम्हारा बैल घूम रहा है।” मालिक ने कहा, “उनके गर्दन में बंधी घंटी की आवाज़ से।” इस पर तर्क शास्त्री पढ़क्कू ने कहा, “कभी बैल अड़ गया तो तुम्हें उस दिन तेल नहीं मिलेगा।” पढ़क्कू की बात सुनकर मालिक हँसा और बोला, “तर्कशास्त्री पढ़क्कू बैलों को युक्तियों की बातें नहीं आती हैं क्योंकि उसने तर्क शास्त्र नहीं पढ़ा है।”

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पढ़क्कू की सूझ
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अध्याय 11: पढ़क्कू की सूझ - पढ़क्कू की सूझ [पृष्ठ ९४]

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एनसीईआरटी Hindi - Rimjhim Class 4
अध्याय 11 पढ़क्कू की सूझ
पढ़क्कू की सूझ | Q 1. | पृष्ठ ९४

संबंधित प्रश्न

तीसरी कक्षा में तुमने रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘मिर्च का मज़ा’ पढ़ी थी। अब तुमने उन्हीं की कविता ‘पढ़क्कू की सूझ’ पढ़ी।

दोनों में से कौन-सी कविता पढ़कर तुम्हें ज्यादा मज़ा आया?

(चाहो तो तीसरी की किताब फिर से देख सकते हो।)


तुम्हें काबुली वाला ज्यादा अच्छा लगा या पढ़क्कू? या कोई भी अच्छा नहीं लगा?


अपने साथियों के साथ मिलकर एक-एक कविता ढूँढो। कविताएँ इकट्ठा करके कविता की एक किताब बनाओ।


कोल्हू का बैल ऐसे व्यक्ति को कहते हैं जो कड़ी मेहनत करता है या जिससे कड़ी मेहनत करवाई जाती है।

मेहनत और कोशिश से जुड़ा कुछ और मुहावरा नीचे लिखा हैं। इसका वाक्य में इस्तेमाल करो।

पसीना बहाना


कोल्हू का बैल ऐसे व्यक्ति को कहते हैं जो कड़ी मेहनत करता है या जिससे कड़ी मेहनत करवाई जाती है।

मेहनत और कोशिश से जुड़ा कुछ और मुहावरा नीचे लिखा हैं। इसका वाक्य में इस्तेमाल करो।

एड़ी-चोटी का जोर लगाना


पढ़क्कू का नाम पढ़क्कू क्यों पड़ा होगा?


हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।

पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ

नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।

बैल हमारा नहीं अभी तक मंतिख पढ़ पाया है।


हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।

पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ

नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।

सिखा बैल को रखा इसने निश्चय कोई ढब है।


हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।

पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ

नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।

जहाँ न कोई बात, वहाँ भी नई बात गढ़ते थे।


पढ़क्कू नई-नई बातें गढ़ते थे।

बताओ, ये लोग क्या गढ़ते हैं?

सुनार ____________ कवि ____________
लुहार ____________ कुम्हार ____________
ठठेरा ____________ लेखक ____________

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