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तीसरी कक्षा में तुमने रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘मिर्च का मज़ा’ पढ़ी थी।अब तुमने उन्हीं की कविता ‘पढ़क्कू की सूझ’ पढ़ी। दोनों में से कौन-सी कविता पढ़कर तुम्हें ज्यादा मज़ा आया? - Hindi (हिंदी)

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प्रश्न

तीसरी कक्षा में तुमने रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘मिर्च का मज़ा’ पढ़ी थी। अब तुमने उन्हीं की कविता ‘पढ़क्कू की सूझ’ पढ़ी।

दोनों में से कौन-सी कविता पढ़कर तुम्हें ज्यादा मज़ा आया?

(चाहो तो तीसरी की किताब फिर से देख सकते हो।)

संक्षेप में उत्तर

उत्तर

दोनों में से मुझे ‘पढ़क्कू की सूझ’ कविता ज्यादा मजेदार लगी। इसमें पढ़क्कू तर्कशास्त्री है। पढ़ा-लिखा है। फिर भी बैल के मालिक से मूर्खतापूर्ण सवाल करता है। इससे कविता काफी रोचक बन जाती है।

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पढ़क्कू की सूझ
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अध्याय 11: पढ़क्कू की सूझ - पढ़क्कू की सूझ [पृष्ठ ९४]

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एनसीईआरटी Hindi - Rimjhim Class 4
अध्याय 11 पढ़क्कू की सूझ
पढ़क्कू की सूझ | Q (क) | पृष्ठ ९४

संबंधित प्रश्न

‘पढ़क्कू की सूझ’ कविता में एक कहानी कही गई है। इस कहानी को तुम अपने शब्दों में लिखो।


अपने साथियों के साथ मिलकर एक-एक कविता ढूँढो। कविताएँ इकट्ठा करके कविता की एक किताब बनाओ।


कोल्हू का बैल ऐसे व्यक्ति को कहते हैं जो कड़ी मेहनत करता है या जिससे कड़ी मेहनत करवाई जाती है।

मेहनत और कोशिश से जुड़ा कुछ और मुहावरा नीचे लिखा हैं। इसका वाक्य में इस्तेमाल करो।

पसीना बहाना


कोल्हू का बैल ऐसे व्यक्ति को कहते हैं जो कड़ी मेहनत करता है या जिससे कड़ी मेहनत करवाई जाती है।

मेहनत और कोशिश से जुड़ा कुछ और मुहावरा नीचे लिखा हैं। इसका वाक्य में इस्तेमाल करो।

एड़ी-चोटी का जोर लगाना


तुम कौन-सा काम खूब मन से करना चाहते हो? उसके आधार पर अपने लिए भी पढ़क्कू जैसा कोई शब्द सोचो।


हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।

पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ

नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।

मगर बूंद भर तेल साँझ तक भी क्या तुम पाओगे?


हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।

पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ

नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।

बैल हमारा नहीं अभी तक मंतिख पढ़ पाया है।


हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।

पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ

नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।

सिखा बैल को रखा इसने निश्चय कोई ढब है।


हाँ जब बजती नहीं, दौड़कर तनिक पूँछ धरता हूँ।

पूँछ धरता हूँ का मतलब है पूँछ पकड़ लेता हूँ

नीचे लिखे वाक्य को अपने शब्दों में लिखो।

जहाँ न कोई बात, वहाँ भी नई बात गढ़ते थे।


पढ़क्कू नई-नई बातें गढ़ते थे।

बताओ, ये लोग क्या गढ़ते हैं?

सुनार ____________ कवि ____________
लुहार ____________ कुम्हार ____________
ठठेरा ____________ लेखक ____________

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