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प्रश्न
‘हिंदी दिवस’ समारोह के अवसर पर अपने वक्तृत्व में हिंदी भाषा का महत्त्व प्रस्तुत कीजिए ।
उत्तर
प्यारे दोस्तो,
माननीय सभापति महोदय, प्राचार्य जी, मंच पर आसीन अतिथिगण, मेरे गुरुजन व प्यारे साथियों, आज हम सभी यहाँ हिंदी दिवस समारोह मनाने के लिए एकत्र हुए हैं। हमारा देश विविधताओं से परिपूर्ण देश है। इस अवसर पर मैं हिंदी भाषा के महत्त्व के विषय में कुछ कहना चाहूँगी।यहाँ कई जाति, धर्म और संप्रदाय के लोग रहते हैं। सभी की अलग-अलग बोली-भाषाएँ हैं। उन सब में सिरमौर समुन्नत हिंदी भाषा एक। हिंदी हमारे देश की भाषाओं में प्रमुख है। लेकिन आम जनमानस 'तक इसकी पहुँच बहुत अधिक है। १४ सितंबर, १९४९ को संविधान सभा में एकमत से यह निर्णय लिया गया था कि हिंदी भारत की राज भाषा होगी। इसी महत्त्वपूर्ण निर्णय के महत्त्व को प्रतिपादित करने तथा हिंदी को हर क्षेत्र में प्रसारित करने के लिए राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के अनुरोध पर वर्ष १९४३ से संपूर्ण भारत में १४ सितंबर को प्रतिवर्ष 'हिंदी दिवस' के रूप में मनाया जाता है। भारत में लगभग 46 करोड़ और पूरी दुनिया में 80 करोड़ लोग हैं।विश्वके 9 विश्वविद्यालयों में हिंदी भाषा पढ़ी व पढ़ाई जा रही है। रूस, जर्मनी, भूटान, म्याँनमार, नेपाल, श्रीलंका, मॉरिशस, फिजी, सूरिनाम, युगांडा, कनाडा, इंग्लैंड, अमेरिका आदि देशों में हिंदी बोली समझी जाती है। अत: यूँ कहा जा सकता है कि संपर्क भाषा के रूप में हिंदी पूरे देश को जोड़ने का महत्त्वपूर्ण कार्य करती हैं। भारत के अधिकांश राज्यों में तो हिंदी और उससे मिलती-जुलती बोली-भाषा ही प्रचलित है । देश में भले ही हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान अब तक नहीं प्राप्त हुआ है, लेकिन विश्वपटल पर हिंदी ही हिंदुस्तान की भाषा के रूप में जानी-पहचानी जाती है। हिंदी हमारे राष्ट्रीय गौरव की प्रतीक है। इसमें हमारे अतीत की अमूल्य निधियाँ संकलित हैं। धन्यवाद।