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प्रश्न
हित समूह प्रकार्यशील लोकतंत्र के अभिन्न अंग हैं। चर्चा कीजिए।
संक्षेप में उत्तर
उत्तर
- हित समूहों का गठन राजनीति के क्षेत्र में कुछ विशेष हितों की पूर्ति के लिए किया जाता है। ये हित समूह सरकार पर अपना दबाव कायम करते हैं।
- यदि कुछ समूहों को ऐसा प्रतीत होता है कि उनके हित का ध्यान नहीं रखा जा रहा है, तो वे कोई वैकल्पिक पार्टी बना लेते हैं।
- लोकतंत्र लोगों का, लोगों के लिए तथा लोगों के द्वारा निर्मित शासन प्रणाली है। इस प्रणाली के अंतर्गत विभिन्न हित समूहों की सरकार की कार्य प्रणाली के बारे में जानकारी दी जाती है।
- हित समूह निजी संगठन होते हैं। ये सार्वजनिक नीतियों के निर्माण में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं।
- ये एक गैर-राजनीतिक दल होते हैं तथा इनका लक्ष्य अपने हितों की पूर्ति करना होता है। राजनीतिक दल एक संगठित संस्था होते हैं, जिनका लक्ष्य सत्ता प्राप्त कर विशेष कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करना होता है। विभिन्न हित समूह राजनीतिक पार्टियों पर दबाव कायम करते हैं।
- इन हित समूहों को जब तक मान्यता नहीं मिल जाती, एक आंदोलन के तौर पर जाने जाते हैं।
- दबाव समूह भारतीय लोकतंत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करते हैं तथा कई महत्वपूर्ण कार्य करते है। जैसे
(क) जनमत का निर्माण - विभिन्न प्रकार के प्रचार माध्यमों के द्वारा ये एक जनमत का निर्माण करते हैं। ये जनता की सहानुभूति प्राप्त करने व सरकार की व्यवस्था में परिवर्तन के लिए टी.वी., रेडियो, ई-मेल, तथा सामाजिक मीडिया के अन्य साधनों का इस्तेमाल करते हैं। वे ट्वीटर तथा फेसबुक का भी इस्तेमाल अपने विचारों को लोगों के समक्ष रखने हेतु करते हैं।
(ख) प्राकृतिक आपदाओं के समय क्रिया शीलता - इस तरह के हित समूह प्राकृतिक आपदाओं के समय लोगों को मदद पहुँचाते हैं। जैसे केदारनाथ में आई विपदा, भूकंप इत्यादि में हित समूहों ने लोगों की काफी मदद पहुँचाई। इस तरह के कार्यों से ये लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकृष्ट करने में सफल होते हैं तथा अंततः सरकार पर अपना दबाव बनाते हैं।
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भारतीय संविधान
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